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घोघड़,भरमौर, 16 अप्रैल :  वैसे तो पड़ोसी राज्य पठानकोट को भरमौर से जो़ने वाली सड़क को राष्ट्रीय उच्च मार्ग 154ए का स्तर प्राप्त है परंतु बग्गा से भरमौर तक के भाग में इसकी दशा कभी भी जिला स्तरीय सड़क से बेहतर नहीं रही। पिछले मणिमहेश यात्रा काल के बाद से यह उच्च मार्ग और अधिक जोखिम भरा हो गया है। सड़क की दशा सुधारने के लिए लोग कई स्तर सरकार से मांग कर चुके हैं परंतु  सुधार के नाम पर अब तक ढाक के तीन पात ही मिले हैं। सड़क पर असुरक्षित महसूस होने वाले भरमौर के गरीमा गांव से सामान्य नागरिक लोकेन्दर कपूर ने सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाज़रानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नीतिन गड़करी को पत्र लिखकर इस उच्च मार्ग को इसके निर्धारित स्तर का बनाने की मांग की है।
नीतिन गड़करी को भेजे गए पत्र में भरमौर क्षेत्र को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-154A की अत्यंत खराब हालत पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। विशेष रूप से बग्गा डैम से भरमौर तक सड़क की जर्जर स्थिति को तत्काल सुधारने की मांग उठाई गई है।

पत्र में बताया गया है कि यह सड़क लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही है और वर्तमान में बड़े गड्ढों, टूटी सतह, संकरी सड़क और बार-बार होने वाले भूस्खलन के कारण अत्यंत जोखिमपूर्ण बन चुकी है। बरसात के मौसम में जलभराव, मलबा गिरने और कीचड़ के कारण कई स्थानों पर सड़क कई घंटों तक अवरुद्ध हो जाती है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पत्र में उन्होंने हाल ही में घटित कई दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा है कि यह मार्ग चम्बा जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर के लिए जीवनरेखा के रूप में कार्य करता है। स्थानीय लोगों की दैनिक आवश्यकताएं, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आपातकालीन सुविधाएं इसी सड़क पर निर्भर हैं। खराब सड़क के कारण मरीजों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लोकिन्दर कपूर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भरमौर क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश यात्रा में भाग लेते हैं। इसके अलावा 84 मंदिर परिसर और कुगती वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थल भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सड़क की खराब स्थिति से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि सड़क की तत्काल मरम्मत व पुनर्निर्माण, खतरनाक व संकरे हिस्सों का चौड़ीकरण, उचित जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षा बैरियर लगाए जाएं। साथ ही नियमित रखरखाव और दीर्घकालिक विकास योजना लागू करने पर भी जोर दिया गया है।

पत्र में कहा गया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो यह समस्या भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए आम नागरिक की मांग पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।


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