घोघड़, चम्बा, 15 जून : आज सुबह भरमौर मुख्यालय में आपात स्वास्थ्य सेवा वाहन व अग्नि शमन वाहनों के सायरन बजने से लोग एकदम से सकते में आ गए। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आपात सेवा के सायरन क्यों बज रहे हैं। इस दौरान घोघड़ ने लोगों को प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन के पूर्वाभ्यास (मॉक ड्रिल) की सूचना देकर उन्हें शांत करवाया गया।
पहाड़ी क्षेत्र में आपदा कभी भी और किसी भी रूप में दस्तक दे सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए भरमौर उपमंडल में रविवार को वनाग्नि और क्लाउडबर्स्ट जैसे खतरों से निपटने के लिए मॉक एक्सरसाइज की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा के समय प्रशासन और विभिन्न विभागों की तैयारी, संसाधनों की उपलब्धता और आपसी समन्वय को जांचना था।
सरकारी विभाग मैदान में उतरे
पूर्व निर्धारित योजना के मुताबिक प्रशासन, पुलिस, वन, स्वास्थ्य, अग्निशमन, राजस्व, लोक निर्माण, जल शक्ति, आपदा मित्र स्वयंसेवक और अन्य एजेंसियों ने मिलकर पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन किया। काल्पनिक आपदा की स्थिति बनाकर बचाव कार्य, लापता लोगों की खोज, घायलों को प्राथमिक उपचार, अस्पताल तक पहुंचाना, संचार और ट्रैफिक संभालना, राहत शिविर लगाना से लेकर पुनर्वास तक का अभ्यास किया गया।
दो परिस्थितियां, एक मकसद
वनाग्नि वाली परिस्थिति में आग बुझाने, फायर लाइन काटने और प्रभावित इलाके पर नजर रखने की प्रक्रिया दिखाई गई। जबकि क्लाउडबर्स्ट वाली परिस्थिति में बाढ़ में फंसे लोगों को खोजकर सुरक्षित निकालने और तुरंत राहत पहुंचाने का डेमो दिया गया। सभी विभागों ने SOP के अनुसार काम करके आपदा में तेज और समन्वित रिस्पॉन्स दिखाया।अधिकारियों का कहना है कि इस ड्रिल से न सिर्फ विभागों की कमियों का पता चलेगा, बल्कि लोगों में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
मकसद साफ है – किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो।
ये अधिकारी रहे मौजूद
ड्रिल के दौरान तहसीलदार तेज राम भारद्वाज, बीएमओ डॉ दीपेश बराल, एसएचओ बाबू राम, डीएफओ नवनाथ शिवाजी माने और आयुष विभाग के डॉ राकेश चौधरी सहित कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।

