घोघड़, भरमौर (चम्बा), 29 जून 2026 : राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरमौर में वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए नई स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन हेतु अभिभावकों की बैठक 30 जून को आयोजित की जाएगी। बैठक विद्यालय परिसर में दोपहर 12:30 बजे आरंभ होगी।
विद्यालय की प्रधानाचार्य अरुणा चाढ़क ने सभी अभिभावकों एवं संरक्षकों से बैठक में समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय के समग्र विकास, शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ बनाने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में स्कूल प्रबंधन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रधानाचार्य ने कहा कि सभी अभिभावक निर्धारित समय से पूर्व बैठक स्थल पर पहुंचकर एसएमसी गठन की प्रक्रिया में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें, ताकि समिति का गठन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) गाइडलाइंस-2026 के तहत देशभर के विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, समग्र शिक्षा योजना तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अनुरूप तैयार इन दिशानिर्देशों को हिमाचल प्रदेश में भी बिना किसी संशोधन के लागू किया जा रहा है। समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश ने सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में 30 जून 2026 तक नई एसएमसी के गठन के निर्देश दिए हैं।
नई गाइडलाइंस के अनुसार विद्यालयों में विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने तथा शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसएमसी को और अधिक अधिकार एवं जिम्मेदारियां दी गई हैं। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये दिशानिर्देश पूर्व में जारी सभी एसएमसी संबंधी आदेशों और मार्गदर्शिकाओं का स्थान लेंगे।
प्रत्येक विद्यालय में केवल एक ही एसएमसी होगी
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक विद्यालय में केवल एक स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। यह व्यवस्था सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों सहित सभी प्रकार के विद्यालयों पर लागू होगी। निजी विद्यालयों को भी एसएमसी गठित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके साथ ही अब स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (एसएमडीसी) की अलग व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
प्रत्येक विद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह के भीतर एसएमसी का गठन करना अनिवार्य होगा। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सत्र के लिए यह प्रक्रिया 30 जून 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार होंगे सदस्य
नई गाइडलाइंस के अनुसार एसएमसी में सदस्यों की संख्या विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों के आधार पर निर्धारित होगी।
- 100 से कम विद्यार्थी होने पर 12 से 15 सदस्य।
- 100 से 500 विद्यार्थी होने पर 15 से 20 सदस्य।
- 500 से अधिक विद्यार्थी होने पर 20 से 25 सदस्य।
75 प्रतिशत सदस्य होंगे अभिभावक
एसएमसी की कुल सदस्य संख्या में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता अथवा अभिभावक होंगे। शेष 25 प्रतिशत सदस्य तीन वर्गों से लिए जाएंगे—
- स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधि,
- विद्यालय के शिक्षक,
- स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञ, विषय विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी अथवा समुदाय के अग्रणी कार्यकर्ता जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW), आशा कार्यकर्ता (ASHA) और सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM)।
इन सदस्यों का चयन अभिभावक प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।
महिलाओं और वंचित वर्गों को मिलेगा पर्याप्त प्रतिनिधित्व
नई व्यवस्था के अनुसार एसएमसी में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होना अनिवार्य होगा। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEDGs) तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के अभिभावकों का अनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
ऐसी होगी नई एसएमसी की संरचना
नई एसएमसी में निम्नलिखित पद होंगे—
- एक निर्वाचित अभिभावक अध्यक्ष होगा।
- एक निर्वाचित अभिभावक उपाध्यक्ष होगा।
- विद्यार्थियों के माता-पिता/अभिभावक सदस्य होंगे।
- स्थानीय निकाय का निर्वाचित प्रतिनिधि सदस्य होगा।
- विद्यालय का शिक्षक सदस्य होगा।
- स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञ, विषय विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पूर्व विद्यार्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम में से कोई सदस्य होगा।
- विद्यालय का प्रधानाचार्य अथवा प्रभारी सदस्य सचिव होगा।
दो वर्ष का होगा कार्यकाल, हर महीने होगी बैठक
नई एसएमसी का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित किया गया है। समिति की प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा, जिसमें 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति (कोरम) आवश्यक होगी। प्रत्येक बैठक की कार्यवाही लिखित रूप में दर्ज की जाएगी तथा बैठक का नोटिस, उपस्थिति रजिस्टर, एजेंडा और कार्यवृत्त सुरक्षित रखा जाएगा।
30 लाख रुपये तक के निर्माण कार्य करा सकेगी एसएमसी
नई गाइडलाइंस के तहत एसएमसी को विद्यालय में 30 लाख रुपये तक के सभी सिविल निर्माण कार्य सीधे करवाने का अधिकार दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय को तीन वर्षीय स्कूल विकास योजना तैयार करनी होगी, जिसमें वार्षिक कार्ययोजना भी शामिल होगी। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में सोशल ऑडिट कराना भी अनिवार्य किया गया है।
सदस्य सचिव की होंगी अहम जिम्मेदारियां
विद्यालय के प्रधानाचार्य अथवा प्रभारी सदस्य सचिव के रूप में एसएमसी गठन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराएंगे। उन्हें अभिभावकों की वार्षिक आमसभा आयोजित कर चुनाव कराना होगा, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत अभिभावकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। नई एसएमसी के गठन के एक सप्ताह के भीतर सदस्यों की सूची, पदनाम, संपर्क विवरण तथा बच्चों की कक्षा संबंधी जानकारी विद्यालय के प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी। सदस्य सचिव को नियमित बैठकें आयोजित करने, कार्यसूची तैयार करने तथा सभी अभिलेखों का रखरखाव भी सुनिश्चित करना होगा।
सदस्यों को मिलेगा प्रशिक्षण, पोर्टलों पर दर्ज होगी जानकारी
गठन के एक माह के भीतर सभी एसएमसी सदस्यों का क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कराया जाएगा। नई एसएमसी से संबंधित विवरण प्रबंध (PRABANDH) तथा यू-डाइस प्लस (UDISE+) पोर्टल पर भी दर्ज किए जाएंगे।
सीएसआर से जुड़ेगी एसएमसी, 5 जुलाई तक देनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि एसएमसी की गतिविधियों को विभिन्न सरकारी विभागों तथा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि विद्यालयों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकें, आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा सके और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाई जा सके।
समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश ने सभी जिलों को 5 जुलाई 2026 तक नई एसएमसी के गठन एवं अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि एसएमसी गाइडलाइंस-2026 में किसी भी प्रकार का संशोधन या विचलन स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी विद्यालयों में इनका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
