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घोघड़, चम्बा, 20 अप्रैल 2026 : अस्पतालों में मरीजों के कई प्रकार टैस्ट किए जाते हैं जिनके लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की मशीनें उपयोग में लाई जाती हैं। अस्पतालों में Blood Gas Analyzer, Molecular Diagnostics (PCR Machine), Hematology Analyzer (ब्लड काउंट मशीन), Biochemistry Analyzer (बायोकेमिस्ट्री मशीन), Immunoassay Analyzer (इम्यूनोअसे मशीन), ELISA Processor / CLIA System,Fully Automated Lab Systems स्थापित किए जाने के बाद उनमें विशेष प्रकार के रसायन उपयोग होते हैं।   अस्पताल में टैस्ट करने वाली यह मशीनें स्थापित होने से लोग संतुष्ट हो जाते हैं कि आमुक चिकित्सालय में अमुक बीमारी की परीक्षण मशीन का लाभ मिलेगा। परंतु लोगों को क्या मालूम कि जिस सेवा के लिए वे सरकार, विधायक, प्रशासन से मांग करते हैं उसे पूरा करने के लिए कुछ कम्पनियां ऐसी मशीनें तैयार करती हैं कि उनमें उपयोग होने वाले रिजेंट्स भी उन्हीं की कम्पनियों के उपयोग हों ताकि मशीन स्थापित होने के बाद उनमें उपयोग होने वाले रिजेंट्स लगातार मनमाने दामों पर बिकते रहें। ऐसी मशीनों को क्लोजड सिस्टम(Closed System) कहा जाता है।

ऐसा ही एक मामला जनजातीय क्षेत्र भरमौर स्थित नागरिक अस्पताल से सामने आया है। गत दिनों इस अस्पताल में कथित क्लोज़ड सिस्टम आधारित मशीनों के लैब रिऐजेंट्स की खरीद से जुड़े टेंडर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर सोलन स्थित एस.डी. एंटरप्राइजेज ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बताया है। 

क्या है पूरा मामला ? पढ़ें पूरी खबर…

एस.डी. एंटरप्राइजेज सोलन के संस्थापक नवीन कपूर ने बीएमओ/एडीएम भरमौर को भेजी शिकायत में आरोप लगाया कि “Lab Regent Tender HFW/BHR/TENDER-2026/1040-1042” में टेंडर शेड्यूल को लेकर भ्रामक जानकारी दी गई।

शिकायत के अनुसार, पहले टेंडर की तिथि 25 मार्च 2026 थी, जिसे तीन बोली दाताओं की अनुपस्थिति के कारण 17 अप्रैल तक बढ़ाया गया। आरोप है कि 16 अप्रैल को बीएमओ कार्यालय से संपर्क करने पर सुपरिंटेंडेंट ने टेंडर न खुलने की जानकारी दी, लेकिन बाद में 17 अप्रैल को एक ही वेंडर के साथ टेंडर खोल दिया गया।

फर्म ने भरमौर अस्पताल प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया कि

  • वर्षों से एक ही “नियमित ठेकेदार” को लाभ पहुंचाया जा रहा है,
  • टेंडर शर्तों में बार-बार बदलाव कर नए प्रतिभागियों को बाहर किया जाता है,
  • वर्ष 2025-26 की टेंडर प्रक्रिया में भी अंतिम समय पर “पूर्व अनुभव” की अनिवार्य शर्त जोड़ दी गई,
  • टेंडर की सूचना व्यापक रूप से प्रकाशित नहीं की जाती,
  • तकनीकी सवालों के जवाब नहीं दिए जाते, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होती है।

नवीन कपूर ने कहा कि खंड चिकित्सा अधिकारी जिन अधिकारी/कर्मचारी क्लीन चिट दे रहे हैं, उनके विरुद्ध पुखता प्रमाण मौजूद हैं जिन्हें वे जांच के दौरान सामने लाएंगे। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, पारदर्शी प्रक्रिया और L1 आधार पर निष्पक्ष चयन की मांग की है।

विभाग का जवाब—प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार

उधर विवाद पर स्वास्थ्य विभाग ने 20 अप्रैल को जारी अपने जवाब में कहा कि पूरी टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत की गई है।

खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर दीपेश बराल ने उक्त फर्म को उनकी शिकायत के निराकरण हेतु उत्तर भेज दिया गया है। खंड चिकित्सा अधिकारी के अनुसार:

  • लैब रिऐजेंट्स के लिए पहला टेंडर 6 मार्च 2026 को जारी किया गया था।
  • निर्धारित समय तक केवल एक बोली मिलने पर अधिक प्रतिस्पर्धा के लिए 1 अप्रैल 2026 को पुनः टेंडर प्रकाशित किया गया।
  • पुनः प्रकाशित टेंडर में अंतिम तिथि 17 अप्रैल (दोपहर 12 बजे) और उसी दिन 2 बजे बोली खोलने का समय स्पष्ट रूप से उल्लेखित था।

विभाग ने कहा कि एक पेशेवर संस्था होने के नाते संबंधित फर्म की जिम्मेदारी थी कि वह सार्वजनिक विज्ञापन में दिए गए शेड्यूल का पालन करती।

व्यक्तिगत आरोपों को बताया गैर-पेशेवर

शिकायत में बीएमओ कार्यालय के अधिकारी को इंगित करने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस प्रकार के आरोप व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित प्रतीत होते हैं और यह शिकायत निवारण का उचित तरीका नहीं है।

विभाग ने स्पष्ट किया कि टेंडर खोलने या स्थगित करने का निर्णय किसी एक अधिकारी का नहीं होता, बल्कि यह पूरी टेंडर कमेटी द्वारा सामूहिक रूप से लिया जाता है।

तकनीकी कारणों से एकल बोली स्वीकार

पत्र में बताया गया कि यह खरीद ‘मैग्लूमी’ और ‘एरबा’ मशीनों के लिए रिऐजेंट्स से संबंधित है, जो “क्लोज्ड सिस्टम” पर कार्य करती हैं। ऐसे में केवल अधिकृत (OEM) सप्लायर ही उपयुक्त होते हैं।

विभाग के अनुसार:

  • तकनीकी जांच के बाद ही एकल बोली को स्वीकार किया गया,
  • बोलीदाता के पास संबंधित कंपनी की वैध अनुमति सुनिश्चित की गई,
  • अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना प्राथमिकता रही।

साथ ही टेंडर कमेटी द्वारा दरों को उचित बनाए रखने के लिए मोलभाव (नेगोशिएशन) भी किया गया।

कुछ मामलों को RKS बैठक तक टाला

विभाग ने बताया कि कुछ अन्य आइटम्स को आगे की चर्चा के लिए रोगी कल्याण समिति (RKS) की वार्षिक बैठक तक स्थगित रखा गया है, ताकि व्यापक स्तर पर निर्णय लिया जा सके।

आगे की कार्रवाई पर नजर

विभाग ने शिकायत में उठाई गई चिंताओं पर खेद जताते हुए कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है और भविष्य में भी पात्र फर्मों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर विकास शर्मा ने इस विषय पर कहा कि अभी उनके पास इस संदर्भ में शिकायत नहीं पहुंची है। अगर ऐसा मामला सामने आता है तो गम्भीरता से जांच की जाएगी। 

वहीं, फर्म अपने आरोपों पर कायम है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या किसी स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं।

 अब सवाल यह है:

  • क्या “closed system” वास्तव में तकनीकी मजबूरी है?
  • या इसके जरिए प्रतिस्पर्धा सीमित की जा रही है?
  • क्या बाजार में “closed system” के स्थान पर Open/Semi open system मशीनें उपलब्ध नहीं थी?

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