घोघड़, भरमौर, 16 अप्रैल : आगामी पंचायती चुनावों को लेकर चौरासी भाजपा मण्डल भरमौर ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मण्डल अध्यक्ष अंग्रेज कपूर द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से जारी सूचना के अनुसार मण्डल के अंतर्गत आने वाली 14 पंचायतों—सैली, औरा, तूंदा, बड़ग्रां, पूलन, घरेड, चौबिया, कुगती, हड़सर, प्रांघाला, भरमौर, सचूईं, ग्रीमा और खणी के कार्यकर्ताओं व संभावित प्रत्याशियों की एक महत्वपूर्ण बैठक 18 अप्रैल 2026 को सुबह 11:00 बजे पार्टी कार्यालय भरमौर में आयोजित की जाएगी।
जारी सूचना में सभी मण्डल कार्यकारिणी सदस्यों, जिला व प्रदेश पदाधिकारियों, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों तथा बूथ स्तर के त्रिदेवों को अनिवार्य रूप से बैठक में भाग लेने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष बात यह है कि इस बैठक में क्षेत्र के विधायक डॉ. जनक राज भी आमंत्रित किया गया है, जिससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है।
इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा इस बार पंचायत स्तर पर भी संगठित और रणनीतिक तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह भरमौर क्षेत्र में एक नया राजनीतिक प्रयोग माना जाएगा, क्योंकि पारंपरिक रूप से पंचायती चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते रहे हैं।
बैठक में पंचायतवार मजबूत और सहमति वाले उम्मीदवारों के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने पर भी विचार किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा इस स्तर पर संगठित तरीके से प्रत्याशी चयन और चुनाव प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे पंचायत चुनावों की दिशा और परिणामों पर प्रभाव पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि 18 अप्रैल की इस बैठक के बाद भाजपा अपनी रणनीति को किस रूप में सार्वजनिक करती है और क्या वास्तव में पंचायत चुनावों में सीधे तौर पर अपने समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतारती है।
भाजपा का यह पैंतरा मौजूदा विधायक की राजनीतिक जमीन को किस प्रकार कितना प्रभावित करेगा इस पर भी चर्चाएं आरम्भ हो गई हैं। अब तक यही माना जाता रहा है कि पंचायत स्तर के चुनावों में विधायक व सांसदों को प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव राजनैतिक विचारधारा पर नहीं बल्कि स्थानीय ग्रामीण स्तर की समस्याओं, सामाजिक हितों, आपसी सम्बंधों, प्रत्याशी की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए किए जाते हैं। ऐसे में एक ही पार्टी से सम्बंधित कई प्रत्याशी एक पद के चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में विधायक या सांसद द्वारा एक प्रत्याशी का पक्ष लेने से शेष प्रत्याशी उनके खिलाफ हो जाते हैं जिससे सम्बंधित विधायक या सांसद के भविष्य की राजनीतिक राह कठिन हो जाती है।
पंचायत चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को उतारने के लिए की जा रही इस बैठक के विषय में स्थानीय विधायक डॉ जनक राज ने कहा कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है। वैसे वे पंचायत चुनावों में कोई हस्तक्षेप नहीं करते हैं। यह ग्रामीणों के आपसी निर्णयों पर आधारित होने चाहिए ।

