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घोघड़, चम्बा 31 मार्च : ग्राम पंचायत भरमौर में अप्रैल 2022 से मार्च 2024 तक की अवधि में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। इस दौरान किए गए लेखा परीक्षण में कई गंभीर वित्तीय खामियाँ पाई गई हैं। पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड का अंकेक्षण  कनिष्ठ लेखा परीक्षक द्वारा किया गया, जिसमें अनेक वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।

ऑडिट रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर पैरा लगाए हैं-

  बैंक समाधान और रोकड़ बहियाँ में गड़बड़ी

अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, बैंक समाधान विवरणी तैयार न करने के कारण रोकड़ बहियों और बैंक खातों के अंतशेष में ₹8.71 लाख का भारी अंतर पाया गया है। वित्तीय पारदर्शिता में इस गंभीर चूक ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विकास कार्यों में करोड़ों की रोक

समय पर विकास कार्यों पर खर्च न करने के कारण अनुदानों की राशि ₹82.10 लाख का अवरोधन हुआ है। इससे यह स्पष्ट है कि पंचायत ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती है।

अस्थाई दुकानों की बोली में अनियमितता

मेले के दौरान अस्थाई दुकानों की बोली प्रक्रिया में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएँ उजागर हुईं। नकद राशि में बोली प्राप्त की गई, लेकिन चार दुकानों के आबंटन की जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई। प्रत्येक दुकान की बोली ₹30,000 तय की गई थी। बोली लगाने वाले दाताओं के नाम, पते और बोली राशि का कोई रिकॉर्ड पंचायत के पास नहीं है।

तहबाजारी में मनमर्जी किराया वसूली

पंचायत तहबाजारी की दरें निर्धारित करने में सक्षम होने के बावजूद रेहड़ी-फड़ी से मनमर्जी किराया वसूला गया। इस मामले में पंचायत सचिव द्वारा कोई ठोस उत्तर नहीं दिया गया है।

गृहकर वसूली में लापरवाही

पंचायत ने गृहकर की बकाया राशि ₹1,05,750 वसूलने में विफल रही, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ है।

विवाह पंजीकरण शुल्क में अनियमितता

विवाह पंजीकरण शुल्क कम वसूला गया या वसूली गई राशि को बैंक खाते में जमा नहीं किया गया, जिससे पंचायत को वित्तीय हानि हुई है।

राष्ट्रीय संपत्ति निर्देशिका में संपत्तियों का पंजीकरण नहीं

पंचायत मिशन प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय संपत्ति निर्देशिका में पंचायत ने अपनी चल-अचल संपत्तियों को दर्ज नहीं करवाया है।

सामग्री आपूर्ति में गड़बड़ी

रेत, पत्थर और बजरी जैसे आपूर्ति कर्ताओं से बिना डब्ल्यू, एक्स फार्म के ₹11.64 लाख का भुगतान किया गया, जिससे सरकार को ₹0.45 लाख की रॉयल्टी का नुकसान हुआ।

जीएसटी और टीडीएस में गड़बड़ी

वस्तु एवं सेवाकर (GST) में ₹0.55 लाख की संभावित हानि हुई है। साथ ही सेवा प्रदाताओं और संविदाकारों से टीडीएस की कटौती न करने के कारण सरकार को ₹0.40 लाख का नुकसान हुआ।

संदिग्ध और अनुचित भुगतान

पंचायत सचिव और प्रधान द्वारा ₹9.00 लाख का संदिग्ध/अनुचित आहरण और भुगतान किया गया।

सामग्री खरीद में अनियमितता

अनुमोदित दर से अधिक दर पर टाइल की खरीद की गई, जिसमें ₹0.20 लाख का अतिरिक्त भुगतान हुआ। बिना उचित बिलों के ₹18.15 लाख का स्टोर/स्टॉक का भुगतान किया गया।

माप पुस्तिका में त्रुटियाँ

निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका में गलत गणना के कारण वित्तीय हानि हुई। बिना दूरी दर्शाए पत्थर ढुलाई पर ₹0.23 लाख का अनियमित व्यय हुआ।

वार्षिक लेखा और अभिलेखों का अभाव

पंचायत के वार्षिक लेखा खातों, आय-व्यय विवरणों और बैलेंस शीट को लेखा परीक्षण में प्रस्तुत नहीं किया गया। महत्वपूर्ण रजिस्टरों का रखरखाव भी नियमानुसार नहीं किया गया।

ऑडिट टीम की सिफारिश

ऑडिट टीम ने इस रिपोर्ट को गंभीर माना है और उच्चाधिकारियों से मामले की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने अनुशंसा की है कि सरकारी धन के दुर्विनियोजन की संभावनाओं को नकारने के लिए विस्तृत जांच और कड़ी कार्रवाई की जाए।

रिपोर्ट की एक प्रति पंचायत सचिव और पंचायत राज विभाग को भेजकर एक माह के भीतर उत्तर देने को कहा गया है।

रिपोर्ट की प्रति जिला पंचायत अधिकारी चम्बा व खंड विकास अधिकारी भरमौर को भी जारी की गई है।

इस संदर्भ में खंड विकास अधिकारी भरमौर रमनवीर चौहान ने कहा कि यह मामला उनके सेवाकाल से पूर्व का है जिसके बारे में वे नहीं जानते व न ही उन्हें ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी दी गई है।

तत्कालीन पंचायत सचिव दीपक कुमार बताते हैं कि ऑडिट रिपोर्ट की आपत्तियों पर अनुवर्तन रिपोर्ट तैयार की गई है जिसे विभाग को भेजा जाएगा।

इस मामले से जुड़े ग्राम पंचायत भरमौर प्रधान अनिल कुमार बताते हैं कि उन्होंने कोई अनियमितता नहीं बरती है। जिन रुपयों को निकलवाने की बात की जा रही है व स्थानीय जातरों के दौरान कुश्ती करने वाले पहलवानों को दी गई थी। वहीं जिन चार स्टालों की नीलामी को संदिग्ध बताया जा रहा है वे खंड विकास अधिकारी के निर्देश पर स्वंय सहायता समूहों को निशुल्क प्रदान की गई थीं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में आरोप लगाने वालों के विरुद्ध मानहानि का मामला दर्ज करवाया जाएगा।

उपायुक्त चम्बा मुकेश रेपसवाल ने मामले की छानबीन हेतु जिला पंचायत अधिकारी को समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय विधायक डॉ जनक राज ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार व्यवस्था परिवर्तन के ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।


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