घोघड़, भरमौर, 09 जून 2026 : चौरासी मंदिर परिसर भरमौर में मंगलवार को सहायक निदेशक पशुपालन विभाग भरमौर गुलशन कुमार की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भरमौर उपमंडल में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या तथा उनकी संख्या नियंत्रण के लिए प्रस्तावित नसबंदी (Animal Birth Control) एवं एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत आवारा कुत्तों की मानवीय तरीके से नसबंदी की जाएगी तथा उन्हें रेबीज से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना और आम जनता व पालतू पशुओं को उनके आक्रमण व रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के खतरे से सुरक्षित रखना है।
अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोगों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। पंचायतों को कुत्तों को पकड़ने, उनके अस्थायी रख-रखाव, भोजन की व्यवस्था तथा उपचार के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से उसी क्षेत्र में छोड़ने में सहयोग करना होगा।
गौरतलब है कि भरमौर उपमंडल की अधिकांश ग्राम पंचायतों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई स्थानों पर कुत्तों के झुंड लोगों और पालतू पशुओं पर हमला कर चुके हैं। स्थिति ऐसी है कि कई लोग सुबह और शाम अकेले घूमने जाने से भी कतराने लगे हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पशुपालन विभाग इस समस्या के समाधान की दिशा में सक्रिय है। हालांकि, अभियान को सफलतापूर्वक लागू करना चुनौतीपूर्ण रहेगा क्योंकि न तो यहां विभाग व न ही पंचायतों के पास आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके रख-रखाव के लिए प्रशिक्षित टीमें उपलब्ध हैं।
जानकारों का अनुमान है कि यदि पंचायतें प्रशिक्षित टीमों की व्यवस्था करती हैं तो प्रत्येक कुत्ते के पकड़ने, नसबंदी, टीकाकरण और रख-रखाव पर लगभग 2,500 से 3,000 रुपये तक खर्च आ सकता है। ऐसे में अभियान की सफलता काफी हद तक पंचायतों और स्थानीय समुदाय के सहयोग पर निर्भर करेगी।
बहरहाल इस पूरे कार्यक्रम की सफलता इस बात पर टिकी है कि पशुपालन विभाग के इस कार्य में उनका सहयोग कौन और कितना करेगा। लोग आशा कर रहे हैं कि यह कार्यक्रम “न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी” वाली कहावत बन कर न रह जाए।
बैठक में समाजसेवी मोती शर्मा, राजेन्द्र बंटी, सुरेश शर्मा, विनोद शर्मा, अमित शर्मा और वीरेंद्र शर्मा सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

