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घोघड़, भरमौर, 09 जून 2026 : भरमौर उपमंडल में जंगली जानवरों, विशेषकर तेंदुओं के लगातार बढ़ते हमलों ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर हुई तीन बड़ी घटनाओं में 60 से अधिक भेड़-बकरियां मारी जा चुकी हैं, जबकि दर्जनों पशु अब भी लापता हैं। ताजा घटना सोमवार देर रात सचूईं पंचायत के भरमाणी माता मंदिर क्षेत्र में सामने आई, जहां तेंदुए के हमले में 14 भेड़ें मौत का शिकार हो गईं तथा 15 भेड़-बकरियां लापता हो गईं।

भरमाणी माता मंदिर के पास देर रात हमला

जानकारी के अनुसार सचूई पंचायत निवासी सतपाल ठाकुर और बुद्धि सिंह अपनी भेड़-बकरियों के साथ भरमाणी माता मंदिर के समीप डेरा लगाए हुए थे। सोमवार रात लगभग तीन बजे एक तेंदुए ने झुंड पर हमला कर दिया। मंगलवार सुबह तक 14 भेड़ें मृत पाई गईं, जबकि 15 भेड़-बकरियों का कोई पता नहीं चल पाया है। घटना की सूचना तत्काल प्रशासन, वन विभाग तथा पशुपालन विभाग को दी गई। इसके बाद वन एवं पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी।

पूलन पंचायत में बर्फानी तेंदुए का हमला

इसी दौरान एक अन्य गंभीर घटना ग्राम पंचायत पूलन की चारागाह में सामने आई है। यहां घरेड़ पंचायत के धुड़ैणका गांव निवासी पशुपालक चमन लाल के रेवड़ पर बर्फानी तेंदुए ने हमला कर दिया। मंगलवार सुबह झुंड की गिनती के दौरान 16 भेड़ें मृत पाई गईं, जबकि 6 भेड़ें लापता थीं। इस घटना से पशुपालक को लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्राम पंचायत पूलन के प्रधान अंग्रेज कपूर ने बताया कि घटना की सूचना प्रशासन, राजस्व विभाग और वन विभाग को दे दी गई है। विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

गांवों तक पहुंच रहे हिंसक जानवर

तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीती रात ग्राम पंचायत घरेड़ के उपरली पंजसेई गांव में भी एक तेंदुआ घर के आंगन तक पहुंच गया और जीतू राम की बंधी हुई बकरी को मार डाला। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब हिंसक वन्यजीव जंगलों और चारागाहों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।

पांच दिनों में तीसरी बड़ी घटना

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले पांच दिनों में यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले पूलन पंचायत में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में लगभग 30 भेड़-बकरियां जंगली जानवरों का शिकार बनी थीं, जबकि करीब 20 पशु लापता हो गए थे।

पशुपालकों ने मांगी राहत

भेड़पालक अमर सिंह, जिगरी राम, अंग्रेज सिंह, करनैल सिंह और चतरो राम ने प्रशासन एवं वन विभाग से प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भेड़-बकरियां ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं। वर्षभर कड़कती धूप, भारी वर्षा और कड़ाके की ठंड के बीच पशुपालक अपने झुंडों के साथ रहकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में तेंदुओं के एक हमले से वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। पशुपालकों ने कहा कि इस प्रकार के नुकसान की भरपाई स्वयं करना उनके लिए लगभग असंभव है, इसलिए सरकार और प्रशासन को शीघ्र राहत राशि प्रदान करनी चाहिए।

विधायक डॉ. जनक राज ने उठाई राहत की मांग

भरमौर-पांगी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. जनक राज ने भी इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से प्रभावित परिवारों को शीघ्र एवं पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे हमलों से पशुपालकों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान की जानी चाहिए तथा वन विभाग को मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

शिकारी जानवरों की लगातार बढ़ रही घटनाओं ने भरमौर क्षेत्र के पशुपालकों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले महीनों में पशुधन को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब क्षेत्र के लोग प्रशासन और वन विभाग से केवल मुआवजे की ही नहीं, बल्कि तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए स्थायी समाधान की भी अपेक्षा कर रहे हैं।

 


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