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घोघड़, चम्बा, 30 मार्च : भरमौर मुख्यालय में कूड़ा निष्पादन प्रक्रिया वर्षों से समस्या रही है। मात्र 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले भरमौर मुख्यालय में साफ-सफाई का क्षेत्र और भी बहुत सीमित होने के बावजूद यहां सफाई लचर दर्जे की है।

स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या से पार पाने के दृष्टिगत अब घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना लागू करने की प्रक्रिया आरम्भ की है। इसके पहले चरण में मुख्यालय व आसपास स्थापित किए गए कूड़ेदानों को वहां से हटाया जा रहा है।

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर विकास शर्मा ने कहा कि मुख्यालय में घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने की योजना लागू की जा रही है। मुख्यालय के सभी कूड़ा पात्रों को हटा दिया गया है। यह कार्य नगर योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। अब कूड़ा एक जगह एकत्रित किए जाने के बजाए प्रशासन घर-घर से एकत्रित करेगा। जिसे प्रंघाला नाला में बनाए गए शैड में पहुंचाकर उसकी प्रकृति के अनुसार पृथक करके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभी यह प्रक्रिया ट्रायल के तौर पर आरम्भ की जा रही है। कूड़ा एकत्रित करने एक एवज में प्रत्येक घर व दुकान से निर्धारित मासिक शुल्क भी लिया जाएगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने बताया कि शुल्क व्यापार मंडल के साथ बैठक कर निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि योजना के तहत सम्बंधित नगर में कूड़ापात्र रखने का विधान नहीं है इसलिए नगर को साफ-सुथरा रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्यालय में सफाई व्यवस्था प्रशासनिक लापरवाही के कारण पटरी से उतरी है। जबकि आरम्भिक वर्षों में यह कार्य बहुत बढ़िया तरीके से चला था। अधिकारियों के बदलने के साथ मुख्यालय में सफाई व्यवस्था पर सरकारी धन तो खर्च होता रहा परंतु धरातल पर काम होना कम होता गया। हालात यह हो गए कि लोग प्रशासन से इस बारे शिकायतें तो करते लेकिन उन पर सुनवाई न हुई। अगर उस समय अधिकारी कार्य का निरीक्षण व समीक्षा करते तो आज यह समस्या उत्पन्न न होती।

बहरहाल अब नए प्रशासनिक अधिकारी ने कार्यभार सम्भालने के बाद  व्यवस्था को पटरी पर लाने की प्रक्रिया नए सिरे से आरम्भ की है । इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है। सड़क से दूर स्थित घरों से कूड़ा लाने में काफी समय खर्च होगा। क्योंकि इस कथित पहाड़ी नगर में सैकड़ों घर सड़क से अछूते हैं जहां से कूड़ा एकत्रित करने के लिए कई दर्जन कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। 

गौरतलब है कि भरमौर मुख्यालय में केवल दो सड़कों के आस-पास सफाई की जाती रही है। जिसमें से एक सड़क हैलीपैड से पुराना बस अड्डा व दूसरी सड़क पट्टी से पुराना बस अड्डा की सड़क के आसपास सफाई की जाती है जबकि कभी कभार पुराना बस अड्डा से सावनपुर व गोरपटा से राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तक के पैदल मार्ग पर भी झाड़ू फेरा जाता है। इस कार्य को प्रशासन लाखों रुपए खर्च करके ठेके पर करवा रहा है। लाखों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद धरातल पर आलम यह है कि निकासी नालियां मिट्टी व कचरे से भरी रहती हैं। नालियों का पानी सड़कों पर बह निकलता है। कूड़ेदान कई-कई दिनों तक खाली नहीं किए जाते। शौचालयों की बदबू की बात इस समाचार में नहीं करेंगे।

यहां यह जानना भी आवश्यक है कि भरमौर मुख्यालय में सफाई का जिम्मा ग्राम पंचायत भरमौर ने भी उठाया है ऐसे में प्रश्न उठता है कि दो-दो संस्थाओं द्वारा एक ही स्थान पर सफाई किए जाने के बावजूद इस स्थान को साफ सुथरा क्यों नहीं रखा जा पा रहा है ?

मुख्यालय की ग्राम पंचायत भरमौर,सचूईं व घरेड़ का कुछ भाग टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग के अंतर्गत शामिल किया गया है। जिसे विशेष क्षेत्र प्राधिकरण(साडा) नाम के माध्यम से व्यवस्थित किया जा रहा है। मुख्यालय में साफ सफाई की जिम्मेदारी अब तक साडा के माध्यम से चल रही है।

सूत्र बताते हैं कि साडा के पास इस व्यवस्था को चलाए रखने के लिए धन नहीं है इसलिए अब लोगों की जेब से एकत्रित किए जाने वाले फंड से मुख्यालय में सफाई व्यवस्था चलाने की योजना लागू की जा रही है।

 

 


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