घोघड़, चम्बा, 29 मार्च : पिछले कुछ वर्षों से भरमौर क्षेत्र में सेब ही नहीं अखरोट भी क्षेत्र के लोगों की आजीविका में मुख्य भूमिका निभा रहा है। बाजार मिलने के बाद लोगों ने अखरोट को सेब के विकल्प के रूप में उगाना आरम्भ कर दिया है। लेकिन जहां सेब को मौसम व बीमारियों के प्रति बहुत संवेदनशील माना जाता है वहीं अखरोट भी मौसम में हो रहे बदलाव की भेंट चढ़ रहा है।
मलकौता गांव के बागवान शिवदास, सुरेंदर कुमार, अजय कुमार, उल्लांसा के अक्षय शर्मा बताते हैं कि इस वर्ष अखरोट पर मध्य मार्च माह में ही फूल व पत्तियां आनी आरम्भ हो गईं थी। इस दौरान मार्च माह में हिमपात होने के बाद अखरोट पर आए फूल व पत्तियां जल गई हैं। बागवानों ने कहा कि उनकी अखरोट की फसल पूरी तरह बरबाद हो गई है।
गौरतलब है कि इस वर्ष शीतकाल का हिमपात देरी से जनवरी माहांत में हुआ और उसके तुरंत बाद तापमान में लगातार बढ़ौतरी होती गई । बागवानों का कहना है कि तापमान बढ़ने के कारण अखरोट पर समय से पहले पत्तियां व फूल निकल आए थे। जबकि 2200 से 3000 मी. की उंचाई वाले क्षेत्रों में अखरोट पर फूल व पत्तियां अप्रैल-मई माह में निकलना आरम्भ होती हैं। इस दौरान गत 16 व 20 मार्च को भरमौर उपमंडल में भारी हिमपात हो गया जिस कारण अखरोट के फूल और पत्ते जल गए हैं।
बागवानों का कहना है कि क्षेत्र निचले भाग जहां बर्फ कम गिरी थी वहां अखरोट को कम नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी अखरोट की फसल के हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।


