घोघड़, चम्बा, 27 मार्च : आयुष विभाग भरमौर द्वारा आज चयनित आयुष ग्राम सिरडी, पूलन व पालन में बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु स्वर्णप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपमंडल अधिकारी (ना.) भरमौर विकास शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में छः माह से 16 वर्ष तक के 250 बच्चों को आयुर्वेदिक पद्धति के अनुसार स्वर्णप्राशन पिलाया गया।
कार्यक्रम के दौरान आयुष विभाग के चिकित्सकों एवं कर्मियों ने अभिभावकों को स्वर्णप्राशन के महत्व एवं इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उपमंडलाधिकारी भरमौर ने आयुष विभाग के इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत लाभदायक हैं इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
आयुष विभाग के उपमंडल आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ राकेश कुमार चौधरी के अनुसार स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म, घी एवं शहद के मिश्रण को बच्चों को दिया जाता है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, स्मरण शक्ति एवं बुद्धि विकास में सहायक मानी जाती है।
यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। बार-बार होने वाली सर्दी-जुकाम एवं संक्रमण से बचाव करके यह बच्चों की स्मरण शक्ति एवं बुद्धि विकास में उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि स्वर्णप्राशन पाचन तंत्र को मजबूत कर शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ाता है जिससे बच्चों की एकाग्रता एवं सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है।
गौरतलब है कि स्वर्णप्राशन आयुर्वेद की एक प्राचीन पद्धति है, जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक जनस्वास्थ्य कार्यक्रम के रूप में चलाया जाता है। यह कार्यक्रम खासतौर पर 0 से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए आयोजित किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस आयु वर्ग के बच्चों को हर माह स्वर्णप्राशन की खुराक से बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के साथ भाग लिया। आयुष विभाग की टीम ने छः माह से 16 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्णप्राशन की खुराक दी। इस अवसर पर आयुष विभाग के एसएमओ डॉ करन कटोच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

