घोघड़, नई दिल्ली 11 मार्च : Supreme Court of India ने कोविड वैक्सीनेशन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वैक्सीन से संभावित नुकसान की स्थिति में प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के लिए नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी तैयार की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की निगरानी के लिए फिलहाल जो प्रणाली लागू है, वही जारी रहेगी और इसके लिए अलग से नया विशेषज्ञ पैनल बनाने की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की खंडपीठ ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से संबंधित याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को वैक्सीन के कारण गंभीर स्वास्थ्य नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सके, इसके लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
क्या है नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी
नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी का अर्थ है कि यदि किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान होता है तो उसे मुआवजा दिया जा सकता है, भले ही किसी संस्था, कंपनी या सरकार की गलती साबित न हुई हो। इस नीति का उद्देश्य प्रभावित व्यक्ति को शीघ्र राहत प्रदान करना है।
याचिका के आधार पर आया फैसला
यह निर्णय रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा वर्ष 2021 में दायर याचिका पर सुनाया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मृत्यु कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई। इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने मुआवजा नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान पिछले वर्ष 13 नवंबर को लंबी बहस हुई थी। उस समय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा था कि अदालत यह तय करेगी कि विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाना चाहिए या नहीं और इस संबंध में क्या निर्देश जारी किए जाने आवश्यक हैं। इसके बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया था।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पहले दायर अपने हलफनामे में कहा था कि कोविड वैक्सीन स्वेच्छा से लगवाई जाती है, इसलिए किसी संभावित दुष्प्रभाव के लिए सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने यह भी कहा था कि लोग जोखिम की जानकारी के बावजूद वैक्सीन लगवाते हैं।
आम लोगों को क्या होगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आम लोगों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं—
-
यदि किसी व्यक्ति को कोविड वैक्सीन से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान होता है तो उसे सरकारी मुआवजा मिलने का रास्ता साफ होगा।
-
प्रभावित परिवारों को न्याय पाने के लिए लंबे कानूनी संघर्ष से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।
-
मुआवजा नीति लागू होने से सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
-
वैक्सीनेशन कार्यक्रम में पारदर्शिता और भरोसा मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नीति से भविष्य में बड़े पैमाने पर चलने वाले टीकाकरण अभियानों में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और किसी अप्रत्याशित दुष्प्रभाव की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को समय पर सहायता मिल सकेगी।

