घोघड़, नई दिल्ली, 01 अप्रैल : जम्मू-कश्मीर में तीन नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक संचालन समिति और पुलिस महानिदेशक (DGP) की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है।
लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अकादमी, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, जिला पुलिस लाइनों और बटालियन प्रशिक्षण केंद्रों में आयोजित किए जा रहे हैं। कानूनों का अनुवाद उर्दू, डोगरी और कश्मीरी भाषाओं में पूरा कर लिया गया है, ताकि आम जनता और पुलिसकर्मियों को इनकी बेहतर समझ हो।
संयुक्त जागरूकता कार्यक्रम भी जोर-शोर से चल रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस अन्य सरकारी विभागों के सहयोग से हर माह के दूसरे और चौथे सप्ताह में राज्य के सभी 282 प्रखंडों में इन कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।
जांच अधिकारियों को ई-शक्ति (श्रव्य-दृश्य रिकॉर्डिंग एप्लिकेशन) सहित सभी अपराध और अपराधी निगरानी नेटवर्क प्रणाली (CCTNS) के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया है। ई-समन, एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सूचना भेजने की प्रणाली को भी पूरी तरह कार्यात्मक बना दिया गया है।
अब तक 975 राजपत्रित अधिकारी, 60,890 पुलिसकर्मी और 254 न्यायिक अधिकारी इन कानूनों के तहत प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (TOT) कार्यक्रम के तहत 191 मुख्य प्रशिक्षक और 118 अन्य कर्मियों को गांधीनगर के राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) में प्रशिक्षित किया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने IGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का भी व्यापक उपयोग किया है। इस पर 50,984 पुलिसकर्मी पंजीकृत हैं, जिन्होंने अब तक 1,21,000 पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जिनमें से 1,10,773 पाठ्यक्रम नए आपराधिक कानूनों पर आधारित हैं।
नए कानूनों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए मुख्य सचिव द्वारा पाक्षिक समीक्षा बैठकें और गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी व अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।