घोघड़, चम्बा(भरमौर) 13 जून : पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों का कार्य पूरा कर विद्यालय लौटे अनेक अध्यापकों को अब जनगणना कार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वहीं भरमौर क्षेत्र में हर वर्ष की तरह आगामी मणिमहेश यात्रा के दौरान भी प्रबंधन संबंधी विभिन्न दायित्व अध्यापकों को दिए जाने की संभावना है। ऐसे में एक बार फिर यह प्रश्न चर्चा का विषय बन गया है कि यदि अध्यापक लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई कब और कैसे होगी?
भरमौर क्षेत्र में विद्यालयों का शैक्षणिक कैलेंडर पहले ही विभिन्न अवकाशों से प्रभावित रहता है। शीतकालीन अवकाश, ग्रीष्म एवं वर्षाकालीन अवकाश, रविवार, द्वितीय शनिवार तथा विभिन्न राजपत्रित अवकाशों को मिलाकर वर्ष में लगभग 150 दिन ऐसे होते हैं जब नियमित शिक्षण कार्य नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त स्थानीय मेलों, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और अध्यापकों के आवश्यक अवकाशों का भी प्रभाव पड़ता है।
इस वर्ष अध्यापकों को पंचायत चुनावों की ड्यूटी में लगभग एक माह तक लगाया गया। इसके बाद मतगणना कार्य और अब जनगणना की जिम्मेदारी भी दी जा रही है। वहीं आगामी मणिमहेश यात्रा के दौरान भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अध्यापकों की सेवाएं लिए जाने की परंपरा रही है। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि सीमित शैक्षणिक अवधि में पूरे वार्षिक पाठ्यक्रम को पूरा करना विद्यार्थियों और अध्यापकों दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
शिक्षाविदों का मानना है कि जब उपलब्ध शिक्षण दिवस लगातार कम होते जाते हैं तो अध्यापकों पर पाठ्यक्रम शीघ्र पूरा करने का दबाव बढ़ता है। परिणामस्वरूप न तो अध्यापक अपनी पूरी क्षमता से विषय का अध्यापन कर पाते हैं और न ही विद्यार्थियों को विषयवस्तु को समझने और आत्मसात करने के लिए पर्याप्त समय मिल पाता है।
इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक डॉ. जनक राज ने भी आपत्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि अध्यापकों को उनके मूल दायित्व शिक्षण कार्य से हटाकर अन्य प्रशासनिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अध्यापकों की अधिकतम उपलब्धता कक्षाओं में सुनिश्चित करना आवश्यक है।
वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरमौर के अध्यापक-अभिभावक संघ ने भी अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर चिंता जताई है। संघ ने प्रधानाचार्य के माध्यम से मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को पत्र भेजने का प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें मांग की गई है कि अध्यापकों को विद्यालयी गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य कार्यों में तैनात न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि अध्यापकों को मणिमहेश यात्रा ड्यूटी पर न भेजा जाए।
विद्यालय की प्रधानाचार्य अरुणा चाढ़क ने बताया कि चुनाव संबंधी ड्यूटियां समाप्त हो चुकी हैं और उससे जो शैक्षणिक प्रभाव पड़ना था, वह पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि जनगणना ड्यूटी के लिए जारी रोस्टर में महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े अध्यापकों को यथासंभव मतगणना अथवा अन्य कार्यों से दूर रखने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अभिभावकों द्वारा उठाई गई मांग को शिक्षा मंत्री तथा मुख्यमंत्री के समक्ष भेजा जाएगा।
बहरहाल, यह विषय केवल अध्यापकों की कार्यव्यस्तता का नहीं बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रशासन शिक्षा तथा अन्य प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

