घोघड़, चम्बा, 10 जून 2026 : आज बुधवार को मुख्यालय चम्बा में जिला स्तरीय समन्वय समिति (डीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में तंबाकू नियंत्रण संबंधी गतिविधियों, कोटपा अधिनियम-2003 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तंबाकू मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने तंबाकू उत्पादों के वितरण एवं बिक्री से संबंधित नियमों के प्रभावी पालन, विक्रेताओं के पंजीकरण तथा लाइसेंस प्रणाली से जुड़े दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण एवं प्रवर्तन गतिविधियां बढ़ाने को कहा।
उन्होंने व्यापार मंडल से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने तथा पुलिस विभाग को शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। एचआरटीसी अधिकारियों को बस अड्डों को तंबाकू मुक्त क्षेत्र बनाए रखने तथा वहां तंबाकू उत्पादों के सेवन एवं बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
अमित मैहरा ने बताया कि प्रचलित नियमों के अनुसार निरीक्षण के दौरान यदि किसी बस अड्डा परिसर में बीड़ी अथवा सिगरेट के बट पाए जाते हैं, तो अड्डा प्रभारी पर प्रत्येक बट के लिए 200 रुपये की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में खुले तंबाकू उत्पादों, जैसे खैनी और गुटखा, की बिक्री एवं वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध है। यदि कोई दुकानदार इन प्रतिबंधित उत्पादों का विक्रय करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिला चम्बा के 55 गांव तंबाकू मुक्त घोषित किए जा चुके हैं तथा इस संख्या को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी और सख्त प्रवर्तन से ही तंबाकू मुक्त समाज के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
बैठक का संचालन करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी (तंबाकू नियंत्रण) डॉ. करण हितेषी ने कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा कोटपा अधिनियम-2003 के विभिन्न प्रावधानों और जिले में संचालित जागरूकता एवं प्रवर्तन गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इस दौरान राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) संबंधी बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण एवं मरीज-केंद्रित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मानकों की समीक्षा की गई। डॉ. सुरेश ने बताया कि एनक्यूएएस प्रमाणन से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, स्वच्छता तथा मरीज संतुष्टि में निरंतर सुधार सुनिश्चित होता है।
उन्होंने बताया कि जिला चम्बा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजनगर एवं चनेड़ को राज्य स्तरीय एनक्यूएएस प्रमाणन प्राप्त है। यह प्रमाणन स्वास्थ्य संस्थानों की बेहतर कार्यप्रणाली और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का प्रमाण माना जाता है।
बैठक में पुलिस उपाधीक्षक बलदेव दत्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम सिंह भारद्वाज, जिला स्वास्थ्य अधिकारी कविता महाजन, उपनिदेशक उच्च शिक्षा विकास महाजन, जिला कार्यक्रम अधिकारी कमल किशोर शर्मा, जिला खेल अधिकारी रुपेश कुमार, जिला रोजगार अधिकारी जितेंद्र सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

