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घोघड़, भरमौर, 09 जून 2026 : भरमौर में 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित ग्रीन टैक्स और सेनिटेशन शुल्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) और प्रशासन इसे क्षेत्र के विकास, स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक डॉ. जनक राज ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार और प्रशासन की विफलता करार दिया है।

किन्हें मिलेगी ग्रीन टैक्स से छूट?

एडीएम भरमौर विकास शर्मा ने मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि भरमौर क्षेत्र के स्थानीय निवासियों तथा कुछ अन्य पात्र श्रेणियों को ग्रीन टैक्स से छूट प्रदान की जाएगी।

स्थानीय निवासी इन दस्तावेजों के आधार पर पास प्राप्त कर सकेंगे

  • आधार कार्ड (स्थानीय पते सहित)
  • राशन कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • जमाबंदी/भूमि संबंधी दस्तावेज
  • पंचायत या राजस्व विभाग द्वारा जारी स्थानीय निवास प्रमाण-पत्र
  • अन्य वैध स्थानीय निवास प्रमाण

किन वाहनों को मिलेगी छूट?

  • आरएलए भरमौर में पंजीकृत वाहन
  • भरमौर के स्थानीय निवासियों के वाहन
  • स्थानीय टैक्सी यूनियन के वाहन
  • भरमौर क्षेत्र में कार्यरत सरकारी, अर्द्धसरकारी, बोर्ड, निगम, बैंक एवं शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के वाहन
  • खड़मुख-भरमौर मार्ग पर नियमित आवागमन करने वाले वाहन (विशेष पास के माध्यम से)

प्रशासन ने ऐसे सभी पात्र वाहन मालिकों से उपमंडलाधिकारी (ना.) कार्यालय भरमौर में आवेदन कर पास (छूट प्रमाण-पत्र) प्राप्त करने का आग्रह किया है।

ग्रीन टैक्स की दरें

वाहन श्रेणी प्रस्तावित ग्रीन टैक्स
दोपहिया वाहन ₹50
कार ₹100
एसयूवी / एमयूवी ₹300
बस ₹500

सेनिटेशन शुल्क की दरें

श्रेणी मासिक शुल्क
दुकानें ₹100 प्रतिमाह
आवासीय घर ₹50 प्रतिमाह

प्रशासन का दावा: विकास और स्वच्छता के लिए जरूरी कदम

प्रशासन का अनुमान है कि ग्रीन टैक्स लागू होने के बाद यात्रा सीजन के दौरान लगभग 70 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। इस राशि का उपयोग क्षेत्र में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा विकास कार्यों पर किया जाएगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि साडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी।

विधायक डॉ. जनक राज ने उठाए सवाल

भरमौर-पांगी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. जनक राज ने ग्रीन टैक्स और सेनिटेशन शुल्क लगाने के निर्णय का विरोध करते हुए इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब लोग महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब नए शुल्क और टैक्स लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।

विधायक ने कहा कि विकास कार्यों और स्वच्छता व्यवस्था के लिए संसाधन जुटाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि हर बार राजस्व जुटाने के लिए आम लोगों, छोटे दुकानदारों, यात्रियों और पर्यटकों पर नए कर लगाए जाएंगे, तो इसे प्रशासनिक असफलता माना जाएगा।

पर्यटन पर पड़ सकता है असर

डॉ. जनक राज का कहना है कि भरमौर एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन क्षेत्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में ग्रीन टैक्स लगाने से पर्यटन गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि इसका सीधा असर होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, स्थानीय व्यापार और छोटे दुकानदारों की आय पर पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

04 जून को आयोजित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) की बैठक में भरमौर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय विकास के लिए नए राजस्व स्रोतों पर निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त एवं साडा अध्यक्ष मुकेश रेपसवाल ने वर्चुअल माध्यम से की।

बैठक में उपमंडलाधिकारी (ना.) भरमौर एवं साडा के सचिव विकास शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान साडा की कुल आय लगभग 40 लाख रुपये रही। क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं और स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 1 जुलाई से सेनिटेशन शुल्क तथा ग्रीन टैक्स लागू करने का निर्णय लिया गया है।

आगे क्या?

1 जुलाई से प्रस्तावित ग्रीन टैक्स और सेनिटेशन शुल्क को लेकर भरमौर में बहस तेज हो गई है। प्रशासन का दावा है कि इससे प्राप्त होने वाली आय क्षेत्र की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। वहीं विधायक डॉ. जनक राज और क्षेत्र के कुछ लोगों का मानना है कि इससे आम जनता, व्यापारियों और पर्यटन गतिविधियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

फिलहाल प्रशासन ने स्थानीय निवासियों, स्थानीय टैक्सी यूनियनों तथा विभिन्न संस्थानों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को ग्रीन टैक्स से छूट देने की व्यवस्था की है और इसके लिए पास जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 1 जुलाई से लागू होने वाली नई व्यवस्था को स्थानीय जनता, व्यापारिक वर्ग, पर्यटन उद्योग और जनप्रतिनिधियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया मिलती है तथा इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग क्षेत्र के विकास और स्वच्छता सुधार में किस प्रकार किया जाता है।

वर्तमान में इस मुद्दे पर दो प्रमुख प्रश्न चर्चा में हैं—

  1. क्या ग्रीन टैक्स और सेनिटेशन शुल्क से प्राप्त होने वाली आय वास्तव में क्षेत्र की स्वच्छता और विकास में प्रभावी रूप से खर्च होगी?
  2. क्या पर्यावरण संरक्षण और विकास के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने का भार आम जनता और पर्यटकों पर डालना उचित है?

1 जुलाई नजदीक आते ही भरमौर में यह मुद्दा जनचर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर टिकी हुई है।


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