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भरमौर में मणिमहेश न्यास का निर्णय संशोधित, विधायक डॉ. जनक राज के निर्देशों के बाद जारी हुआ नया स्पष्टीकरण

घोघड़, भरमौर, 20 मार्च : मणिमहेश न्यास द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना में लिए गए निर्णय पर अब संशोधन करते हुए नया स्पष्टीकरण जारी किया गया है। यह बदलाव डॉ. जनक राज (विधायक, भरमौर-पांगी) द्वारा जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देशों के बाद किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यास द्वारा पहले जारी अधिसूचना में 84 मंदिर प्रांगण में भंडारा/कार्यक्रम आयोजन के लिए प्रशासन से तीन दिन पूर्व अनुमति के लेने के आदेश जारी किए गए थे जिन पर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां सामने आई थीं। इस पर संज्ञान लेते हुए विधायक डॉ. जनक राज ने न्यास प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी निर्णयों में आम जनता, श्रद्धालुओं और स्थानीय हितों को सर्वोपरि रखा जाए तथा आवश्यकता अनुसार अधिसूचना में संशोधन किया जाए।

श्री मणिमहेश ट्रस्ट द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना के बाद उत्पन्न भ्रम को दूर करते हुए अब संशोधित सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

 क्या था विवाद

पूर्व अधिसूचना में चौरासी मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों पर “स्वच्छता शुल्क” लागू करने  व धार्मिक आयोजन धाम, नुआला या भंडारा जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पर स्थानीय स्तर पर विरोध दर्ज करवाया गया था।

 विधायक के हस्तक्षेप के बाद बदलाव : मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक डॉ. जनक राज ने न्यास प्रबंधन को निर्देश दिए कि किसी भी निर्णय में जनभावनाओं और परंपराओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके बाद ट्रस्ट ने अधिसूचना की समीक्षा कर नया स्पष्टीकरण जारी किया।

 संशोधित स्पष्टीकरण की मुख्य बातें

1. धार्मिक कार्यों के लिए अनुमति आवश्यक नहीं
चौरासी मंदिर परिसर में श्रद्धालु एवं स्थानीय निवासी अपनी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धाम, नुआला, भंडारा आदि कार्यक्रम बिना किसी पूर्व अनुमति के आयोजित कर सकेंगे। धार्मिक परंपराओं की स्वतंत्रता यथावत बनी रहेगी।

2. स्वच्छता शुल्क का उद्देश्य स्पष्ट
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल “स्वच्छता प्रबंधन” के लिए है, न कि अनुमति शुल्क। इसका उपयोग निम्न कार्यों में किया जाएगा:

  • मंदिर परिसर की दैनिक सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना

  • धार्मिक आयोजनों के बाद निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक निपटान

  • परिसर की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना

3. श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
न्यास ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस शुल्क को “स्वच्छता अंशदान” के रूप में देखें और मंदिर परिसर को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने में सहयोग करें।

 जनहित को मिला महत्व

संशोधित अधिसूचना से यह स्पष्ट हो गया है कि धार्मिक परंपराओं पर कोई रोक नहीं है, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह पहल की गई है।


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