घोघड़, चम्बा 25 मार्च : जनजातीय उपमंडल भरमौर में टीसीपी अधिनियम 1977 के अंतर्गत निर्धारित क्षेत्र जिसे विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) के नाम से जाना जाता है । इस निर्धारित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के विकास कार्यों को आरम्भ करने या फिर इसके लिए योजनाएं तैयार करने या फिर उन्हें लागू करने के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं । गत 13 मार्च 2025 को विभाग ने इसका डवैलप्मैंट प्लान ड्राफ्ट तैयार करके इसकी प्रति आमजन के लिए एसडीएम भरमौर व उपायुक्त कार्यालय में उपलब्ध करवा दी गई है।
टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने वर्ष 2041 तक इस क्षेत्र में किए जाने विकास कार्यों के अलावा निजी ढांचागत निर्माण कार्यों के लिए विशेष नियम तय किए हैं । मोटे तौर पर इसे यूं समझा जा सकता है कि साडा के अंतर्गत आने वाले विशेष क्षेत्र में लोगों को अपने निजि आवास निर्मित करने के लिए साडा कार्यालय से अनुमति लेना आवश्यक होगा। साडा केवल उन्हीं निर्माण कार्यों को अनुमति देगा जो उसके द्वारा निर्धारित नियमों व शर्तों को पूरा करता हो और उन्हें ही बिजली व पानी के कनेक्शन सुविधा मिलेगी जिसके लिए SADA कुछ शुल्क भी लोगों से वसूल करेगा। वहीं आपदा या दुर्घटना के कारण अगर किसी के भवन को कोई हानि पहुंचती है तो केवल उन्हीं भवनों के लिए राहत राशि जारी होगी जो टीसीपी के नियमों के अनुसार बने होंगे। इस प्रकार के और कई नियम विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन पर लागू किए जाने का प्राविधान है।
साडा के सदस्य सचिव एवं उपमंडलाधिकारी भरमौर कुलबीर सिंह राणा बताते हैं कि भरमौर मुख्यालय को अनुशासित व पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए टीसीपी के तहत विकास योजना का मसौदा तैयार किया गया है । इसमें ग्राम पंचायत भरमौर व सचूईं के समूचे क्षेत्र व ग्राम पंचायत घरेड़ के कुछ भाग को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विकास योजना के मसौदे की प्रति उनके व उपायुक्त कार्यालय में मौजूद हैं।सम्बंधित नागरिक इसे पढ़कर कार्यालय में मौजूद रजिस्टर में इस पर आपत्ति व सुझाव लिखकर दे सकते हैं। 11 अप्रैल 2025 तक यह सुझाव आपत्तियां दर्ज करवाई जा सकेंगी।जिसके उपरांत टीसीपी इनमें आवश्यक फेरबदल करके लागू कर देगा।
साडा सदस्य सचिव कुलबीर सिंह राणा ने कहा कि यह डवेलप्मेंट प्लान अगले 16 वर्षों में भरमौर विशेष क्षेत्र में किए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर तैयार किया गया है जिसके लागू होने के बाद इस क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा ।
गौरतलब है कि टीसीपी के इस डवैलप्मेंट प्लान को जो प्रति उपमंडलाधिकारी भरमौर कार्यलय में मौजूद है उसमें करीब 300 पृष्ठ, क्षेत्र के मानचित्र, प्रारूप इत्यादि हैं जिन्हें पढ़ने व समझने के लिए विशेषज्ञों को भी कई दिन का समय लग सकता है।नगर एवं ग्राम योजना विभाग के SADA आपत्तियां व सुझाव देने की समय सीमा प्रदान करने की एक माह की अवधि में 13 मार्च से 11 अप्रैल तक है जबकि इस अवधि के 12 दिन बीत जाने के बावजूद डवेलप्मेंट प्लान ड्राफ्ट की यह प्रति अभी तक किसी भी नागरिक ने नहीं पढ़ी है व न ही किसी ने कोई आपत्ति व सुझाव लिखा है।
ghoghad.com ने भरमौर की विकास योजना के मसौदे का ड्राफ्ट पिछले 12 दिनों से कार्यालय में होने के बावजूद लोगों द्वारा इसे न पढ़े जाने की पड़ताल की तो पता चला कि यहां के जनजातीय लोग न तो टीसीपी के विषय में कुछ जानते हैं व न साडा के। बहुत से लोगों को इस बात का पता नहीं है कि इस योजना के लागू होने के बाद उनके जीवन में क्या परिवर्तन आने वाला है।
ग्राम पंचायत भरमौर के पूर्व प्रधान शिव चरण कपूर बताते हैं कि सरकार पहले यहां के भोलेभाले व कम पढ़े लिखे लोगों को नगर एवं ग्राम योजना के मसौदे की पूरी जानकारी दे ताकि लोगों को भविष्य में होने वाले नियमों के परिवर्तन से सम्बंधित कोई संशय न रहे । उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस ड्राफ्ट की प्रति व आपत्ति व सुझाव दर्ज करवाने के लिए वेबसाइट फॉर्मेट भी उपलब्ध करवाई जाए।