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घोघड़, चम्बा 26 फरवरी : प्रदेश सरकार द्वारा 18 फरवरी 2026 को सरकारी विद्यालयों में सह शिक्षा के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न शिक्षा खंडों में 59 विद्यालयों का विलय करने के  आदेश जारी किए गए थे। करीब 02 किमी के दायरे में मौजूद दो वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों का विलय कर एक विद्यालय बनाने का निर्णय लिया गया है। विलय किए गए विद्यालयों में कन्या विद्यालयों को दूसरे विद्यालय में समाहित कर मुख्य विद्यालय के नाम से जाना जाएगा ऐसा प्राविधान किया गया है।

कन्या विद्यालयों के विलय पर कई स्थानों पर लोगों ने अपना विरोध भी दर्ज करवाया है जिनमें से कुछ इस निर्णय को कन्या शिक्षा विरोधी बता रहे हैं तो कुछ महिला सशक्तिकरण पर हमला । वहीं कुछ स्थानों पर स्कूल के नए नाम पर आपत्ति जता रहे हैं।

राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरमौर भी इन में से एक है। इस विद्यालय का विलय रावमापा भरमौर में किया गया है। इस विद्यालय के विलय के विरोध में लोगों लोगों ने सरकार व शिक्षा मंत्री हिप्र को कई ज्ञापन सौंपे हैं। इन ज्ञापनों के मुख्य बिंदु में स्कूल के नाम को संत कृष्ण गिरि के नाम पर करने पर जोर दिया गया है। 

सरकार के आदेशों के एक सप्ताह बाद विलय किए गए इन विद्यालयों में कुछ व्यवस्था परिवर्तन होते दिख रहे हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं की प्रार्थना सभा अब रावमापा भरमौर के प्रांगण में होना आरम्भ हो गई है। प्रार्थना सभा के बाद छात्राओं को उनके पुराने विद्यालय भवन में कक्षाएं लगाने के लिए भेज दिया जाता है। 

दोनों स्कूलों का संचालन रावमापा भरमौर के प्रधानाचार्य कार्यालय से किया जा रहा है। राजकीय कन्या विद्यालय भरमौर की प्रधानाचार्य अंजू बाला को उपनिदेशक कार्यालय चम्बा बुला लिया गया है।

विद्यालयों में कक्षाएं पूर्ववत ही चल रही हैं। संस्थान के प्रधानाचार्य जगपाल चौहान बताते हैं कि इस समय विद्यालय में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां चल रही हैं। वहीं दूसरी ओर विद्यालय में कन्या विद्यालय की छात्राओं के पहुंचने से क्लासरूम की व्यवस्थाओं से सम्बंधित योजनाएं तैयार की जा रही हैं। 

उन्होंने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र आरम्भ हो चुका है जिसके तहत छठी कक्षा में नए दाखिले हो रहे हैं। अभिभावक छठी कक्षा में किस स्कूल में दाखिला करवाएं के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि छात्राओं के दाखिले अभी पूर्ववत कन्या विद्यालय में ही किए जा रहे है। जिन्हें बाद में विद्यालय प्रशासन द्वारा रावमापा में कक्षावार शामिल कर लिया जाएगा।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के दाखिले जल्द से जल्द करवाएं व पुस्तकें प्राप्त करें। ताकि बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सके।

बहरहाल विद्यालयों को मर्ज किए जाने के बाद सम्बंधित संस्थानों में भी व्यवस्था परिवर्तन की गतिविधियां दिखनी आरम्भ हो गई हैं। सरकार के इस निर्णय से शिक्षा व सरकार धन में होने वाले लाभ-हानि के लिए अब कुछ माह तक का इंतजार करना होगा।


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