Ghoghad.com

घोघड़, चम्बा, 25 जनवरी : गत शुक्रवार से जनजातीय क्षेत्र भरमौर के हिमच्छादित पहाड़ में फंसे दो किशोरों की तलाश आज फिर दिन भर जारी रही परंतु असफलता ही हाथ लगी है। पहले पुलिस के ड्रोन कैमरे से डीपीएफ भरमाणी के जंगल को खंगाला गया परंतु उसमें कुछ स्पष्ट नजर नहीं आया। जिसके बाद सेना के दो हैलीकॉप्टरों ने सर्च अभियान आरम्भ किया। करीब एक घंटे तक युवकों के होने के सम्भावित क्षेत्र की हवाई पड़ताल करने के बाद सेना की जांच टीम को दो स्थान ऐसे लगे जहां वे युवक हो सकते हैं। सांय करीब छः बजे तलाश अभियान समाप्त करने के बाद सेना के हैलीकॉप्टर अपने बेस कैम्प लौट गए हैं ।

गौरतलब है कि जिन विकसित राणा व उसके ममेरे भाई पीयूष की तलाश की जा रही उनमें से 13 वर्षीय पीयूष भले ही शारीरिक रूप से कमजोर है जो इस परिस्थिति को सहन करने में भले ही सक्षम न हो परंतु विकसित राणा की आयु भले ही 19 वर्ष हो परंतु वह शारीरिक व मानसिक रूप से बहुत अधिक मजबूत है। घोघड़ का यह संवाददाता उसे काफी करीब से जानता है। विकसित राणा ऐसे जोखिम का भी सामना करना पसंद करता है जहां बड़े-बड़े मजबूत ह्रदय वाले भी पीछे हट जाएं। उसके गांव मलकौता के लोगों की माने तो अगर वह ऐसी परिस्थिति में अकेला होता तो अब तक किसी भी तरह से घर पहुंच चुकी होता। लेकिन छोटे भाई को सुरक्षित रखने के प्रयास में वह वहां फंस गया है।

आज किए गए सर्च ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए उपमंडलाधिकारी भरमौर विकास शर्मा ने कहा कि लापता युवकों की तलाश के लिए आज तीन चरणों में अभियान चलाए गए एक ओर पुलिस, पर्वतारोहण व स्थानीय लोगों के साथ जमीनी स्तर पर पहाड़ों पर पैदल चलकर खोज की वहीं दूसरी ओर भरमौर हैलीपैड से ड्रोन कैमरे से भरमाणी जंगल में तलाश अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि ड्रोन से मिली वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। चूंकि अधिक ऊंचाई व ड्रोन के रिसीवर से दूरी बढ़ जाने के कारण वीडियो क्वालिटी अच्छी नहीं मिली है। इन दोनों अभियानों कोई जानकारी न मिलने के बाद सेना के हैलीकॉप्टरों की मदद ली गई।

उपमंडलाधिकारी भरमौर ने बताया कि सेना के दो हैलीकॉप्टर सर्च ऑपरेशन हेतु भरमौर पहुंचे। करीब एक घंटा तक हैलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन के बाद दो स्थान पता चले हैं जहां युवकों के होने की सम्भावना दिख रही है। उन्होंने कहा कि मौसम साफ रहा तो कल सुबह फिर से तलाश अभियान चलाया जाएगा और कल SDRF का दल भी इसमें शामिल होगा। उन्होंने कहा कि युवकों को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीण अपनी क्षमता अनुसार आज फिर भरमाणी मंदिर की पहाड़ियों पर तलाश करके निराश आए लेकिन उनके मन प्रश्न रह गए कि क्या सरकार व प्रशासन द्वारा वाकई इन बच्चों को संवेदनशीलता के साथ तलाश किया जा रहा है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार व प्रशासन उन्हें अघोषित मृत मानकर तलाश रहा है ? अगर वाकई युवकों को जिंदा मानकर उन्हें बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है तो यह किस्तों में क्यों किया जा रहा है ? क्योंकि जिस पहाड़ पर दिन में तापमान शून्य से नीचे रहता है वहां रातें कैसे गुजार रहे होंगे? इसके अलावा उनके साथ गए 2-3 कुत्तों का भी क्यों पता नहीं चला ? जबकि कुत्ते ऐसी स्थिति से स्वयं को आसानी से बचा लेते हैं।

परिवारजनों व अन्य लोगों के मन में उठ रहे प्रश्नों के उत्तर शायद कल के तलाश अभियान के बाद मिल जाएं। युवकों की कुशलता के लिए लोग भगवान व देवी-देवताओं से प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

 


Ghoghad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page