घोघड़, नई दिल्ली 26 मार्च : भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246(3) के अनुसार, पशुपालन राज्यों का विषय है। इसके अलावा, अनुच्छेद 243(डब्ल्यू) स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की देखभाल की जिम्मेदारी देता है, जिसमें उनके लिए आश्रय प्रदान करना भी शामिल है। पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार, स्थानीय निकायों को नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से आवारा कुत्तों की जनसंख्या का प्रबंधन करना आवश्यक है।
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने 26 मार्च 2025 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के रूप में यह जानकारी प्रस्तुत करते हुए कहा कि पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान के अनुसार, कुत्तों को केवल अस्थायी रूप से रखा जा सकता है, जब तक वे बीमार या आक्रामक न हों।भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) पशु कल्याण संगठनों (AWO) को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करता है व सरकार द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या प्रबंधन और रेबीज उन्मूलन के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं।
पिछले 5 वर्षों में पशु कल्याण योजनाओं के लिए दी गई धनराशि
वर्ष | नियमित एवं बचाव मवेशी अनुदान (राशि/एडब्ल्यूओ) | आश्रय अनुदान (राशि/एडब्ल्यूओ) | एम्बुलेंस अनुदान (राशि/एडब्ल्यूओ) | प्राकृतिक आपदा अनुदान (राशि/एडब्ल्यूओ) |
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2019-20 | ₹1,55,64,702 / 141 | ₹2,50,00,000 / 24 | ₹26,39,500 / 6 | – |
2020-21 | ₹1,30,00,000 / 182 | ₹1,50,00,000 / 15 | ₹49,41,800 / 11 | ₹2,00,000 / 3 |
2021-22 | ₹1,99,00,000 / 258 | ₹1,50,00,000 / 16 | ₹48,56,650 / 11 | – |
2022-23 | ₹4,45,00,000 / 296 | ₹70,03,535 / 7 | ₹48,65,594 / 11 | ₹50,000 / 1 |
2023-24 | ₹4,08,20,675 / 273 | ₹42,22,048 / 4 | – | – |
महत्वपूर्ण कदम और दिशा-निर्देश
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स्थानीय निकायों द्वारा एबीसी कार्यक्रम का क्रियान्वयन – यह स्वयं या मान्यता प्राप्त पशु कल्याण संगठनों (AWO) के माध्यम से किया जा सकता है।
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राज्यों को परामर्श जारी – सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 11 नवंबर 2024 को परामर्श जारी किया गया।
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विश्व रेबीज दिवस (28 सितंबर) – इस दिन बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों के टीकाकरण को बढ़ावा दिया जाता है।
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संशोधित एबीसी मॉड्यूल – गली के कुत्तों की जनसंख्या प्रबंधन, रेबीज उन्मूलन और मानव-कुत्ता टकराव को कम करने के लिए नया मॉडल लागू किया गया।