घोघड़, चम्बा 28 फरवरी : सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जो मुख्य रूप से उच्च जोखिम वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। एचपीवी एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है जो रिप्रॉडक्टिव ट्रैक्ट में होता है। नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन से एचपीवी और इससे जुड़े कैंसर को रोका जा सकता है।
भरमौर स्वास्थ्य खंड में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगाने की तैयारियां चल रही हैं। खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर दीपेश बराल ने बताया कि एचपीवी (Human Papillomavirus) एक बहुत सामान्य वायरस है जो त्वचा-से-त्वचा या यौन संपर्क से फैलता है। दुनिया भर में अधिकांश लोग जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित हो सकते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण अपने-आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ प्रकार लंबे समय तक बने रहें तो कैंसर का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए भरमौर स्वास्थ्य खंड में तीन कोल्ड चेन प्वाइंट पर एचपीवी वैक्सीन इंजेक्शन लगाए जाएंगे, जो भरमौर, गरोला और होली में स्थापित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों में सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया है और रावमापा भरमौर में एक शिविर लगाया है।
वैक्सीन लगवाने के लिए स्वजनों को इन कोल्ड चेन प्वाइंट पर बालिकाओं की जन्मतिथि प्रमाणपत्र प्रस्तुत करके पंजीकरण करवाना होगा। टीकाकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक सर्टिफ़िकेट दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 29 मार्च से टीकाकरण शुरू हो जाएगा, इससे पहले लोगों को सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
– असामान्य योनि रक्तस्राव, जैसे कि सेक्स के बाद, मासिक धर्म के बीच, या मेनोपॉज के बाद
– योनि स्राव में बदलाव, जैसे कि बदबूदार या खूनी स्राव
– पेल्विक पेन या शारीरिक सम्बंध के दौरान दर्द
– वजन कम होना
– पैरों में सूजन।
एचपीवी वैक्सीन की डोज आमतौर पर 9 से 14 साल की उम्र की लड़कियों को दी जाती है। वैक्सीन की दो डोज 6 महीने के अंतराल पर दी जाती हैं। यदि पहली खुराक 15 साल या उससे अधिक उम्र में दी जाती है, तो चिकित्सीय परामर्श अनुसार तीन खुराकें 1-2-6 महीने के अंतराल पर दी जाती हैं।
कोल्ड चेन का मतलब है ऐसे तापमान-नियंत्रित (ठंडे) स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सिस्टम जहाँ टीके (वैक्सीन) को उसकी क्षमता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए शुरू से लेकर लगाने तक सुरक्षित रखा जाता है। अगर टीके को सही तापमान पर नहीं रखा गया, तो उसका असर कम या समाप्त हो सकता है। ये ऐसे स्थान हैं जहाँ वैक्सीन को डीप फ्रिजर, आइस-लाइनड रेफ्रिजरेटर (ILR) आदि में निर्धारित तापमान (आमतौर पर 2°C से 8°C) पर रखा जा सके।
कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए भी भारत में लाखों कोल्ड चेन प्वाइंट, डीप फ्रिजर और रेफ्रिजरेटर बनाए गए थे ताकि टीके अपनी क्षमता बनाए रखें।
ऐसे ही HPV (सर्वाइकल कैंसर रोकने वाली) वैक्सीन के लिए भी कोल्ड चेन प्वाइंट जरूरी हैं ताकि वैक्सीन उत्पादन से लेकर स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र या टीकाकरण सत्र तक सुरक्षित रहे।

