घोघड़, शिमला 21 मार्च 2026 : हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भेड़-बकरी पालकों (पशुपालकों) के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत लगभग 54,928 करोड़ रुपये के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पारंपरिक चरवाहा समुदाय को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
‘PEHEL’ योजना: 40 हजार परिवारों को सीधा लाभ
मुख्यमंत्री ने PEHEL (Pastoralists Empowerment in Himalayan Ecosystems for Livelihood) योजना के लिए करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया है।
- इस योजना से गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा जैसे पारंपरिक पशुपालक समुदायों के 40 हजार से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा।
- योजना का उद्देश्य आजीविका सुरक्षा, पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक बनाना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:
- प्रत्येक चरवाहे को डिजिटल पहचान कार्ड
- पशुधन का डिजिटल रिकॉर्ड
- पशुधन बीमा की सुविधा
- उन्नत नस्लों (जैसे Rambouillet) को बढ़ावा
- स्थानीय नस्लों का संरक्षण
- गाद्दा कुत्ता प्रजाति को बढ़ावा
यह योजना न केवल आय बढ़ाने बल्कि जोखिम कम करने और पशुपालन को संगठित क्षेत्र में लाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
चरागाह नीति और प्रवास सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1970 से लंबित चरागाह परमिट (Grazing Permit) की समस्या पर भी ध्यान दिया है।
- चरागाह नीति की समीक्षा की जाएगी
- चरवाहों के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित होगा
- प्रवास मार्गों, जल स्रोतों और ठहराव स्थलों की Geo-tagging
- प्रवास के दौरान अधिकारों और सुरक्षा के लिए नया कानून लाने की तैयारी
इससे चरवाहों को प्रशासनिक जटिलताओं और उत्पीड़न से राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊन उत्पादन को बढ़ावा: समर्थन मूल्य की घोषणा
उन्होंने कहा कि प्रदेश में भेड़ पालकों को सबसे बड़ी समस्या ऊन बेचने में आती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:
- ऊन के लिए Market Stabilization Scheme लागू
- ₹100 प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य (Support Price) तय
- यदि बाजार में कम कीमत मिलती है तो DBT के माध्यम से अंतर की भरपाई
- ऊन की Testing, Grading और Packing की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने हेतु 2 करोड़ रुपये का प्रावधान
- NGOs और Farmer Producer Organizations (FPOs) के साथ मिलकर ढांचा तैयार किया जाएगा
समग्र प्रभाव: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि सरकार पारंपरिक पशुपालन को केवल आजीविका नहीं बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित करना चाहती है।
- पशुपालकों की आय बढ़ेगी
- उत्पादों (ऊन, दूध, मांस) का बेहतर बाजार मिलेगा
- रोजगार और स्टार्टअप अवसर बढ़ेंगे
पहाड़ी क्षेत्रों में स्थायी आजीविका मॉडल विकसित होगा
प्रदेश सरकार द्वारा अब तक जारी किए गए तमाम बजटों में भेड़-बकरी पालकों की समस्याओं के लेकर कुछ न कुछ अच्छा जरूर कहा जाता है परंतु अब तक भेड़-बकरी पालकों को उससे कोई विशेष लाभ नहीं हुआ है। प्रस्तुत किए गए इस बजट से इस व्यवसाय से जुड़े परिवारों के जीवन में कितना परिवर्तन होता है यह आगामी समय में दिखेगा।

