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घोघड़, शिमला 13 मार्च : हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत नर्सरी से पहली कक्षा तक प्रवेश के लिए निर्धारित आयु मानदंड को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। इस संबंध में सचिव (शिक्षा) की ओर से स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि प्रवेश प्रक्रिया में तय आयु सीमा का सभी स्कूलों में समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सरकार के अनुसार नर्सरी/बालवाटिका-I से कक्षा पहली तक प्रवेश के लिए पूर्व में जारी 24 नवंबर 2023, 17 दिसंबर 2024 और 24 दिसंबर 2025 के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सरकार स्तर पर मामले की समीक्षा की गई है और विभिन्न अधिकारियों, स्कूलों तथा अभिभावकों की ओर से उठाई गई शंकाओं का समाधान किया गया है।

जारी स्पष्टीकरण के अनुसार जिस बच्चे की आयु निर्धारित मानदंड के अनुसार शैक्षणिक वर्ष में 30 सितंबर तक पूरी हो जाती है, उसे उसी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे का जन्म 15 अप्रैल 2023 को हुआ है और वह शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बालवाटिका-I में प्रवेश लेना चाहता है, तो 30 सितंबर 2026 से पहले उसकी आयु तीन वर्ष से अधिक हो जाएगी, इसलिए उसे प्रवेश के लिए पात्र माना जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई बच्चा पहले से ही 2026-27 के सत्र में किसी प्री-प्राइमरी कक्षा में पढ़ रहा है और वह 30 सितंबर 2026 तक अगली कक्षा के लिए निर्धारित आयु पूरी कर लेता है, तो उसे आयु के अनुसार अगली कक्षा (कक्षा-1 तक) में प्रवेश दिया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे का जन्म 25 अगस्त 2020 है और वह वर्तमान में बालवाटिका-II या बालवाटिका-III में पढ़ रहा है, तो 30 सितंबर 2026 से पहले छह वर्ष की आयु पूरी करने पर वह कक्षा-1 में प्रवेश के लिए पात्र होगा।

हालांकि ऐसे मामलों में प्रवेश अभिभावकों की सहमति से ही दिया जाएगा। यदि बच्चा निर्धारित आयु मानदंड पूरा करता है और अभिभावक सहमत हैं, तो स्कूल उसे प्रवेश देने से मना नहीं कर सकते।

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नर्सरी/बालवाटिका-I से कक्षा-1 तक प्रवेश के लिए संशोधित आयु मानदंड और 30 सितंबर की कट-ऑफ तिथि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से अनिवार्य रूप से लागू होंगे। यदि कोई स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन करता है तो संबंधित व्यक्ति जिला के उपनिदेशक स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक) के समक्ष अपील कर सकता है। उपनिदेशक का निर्णय सभी स्कूलों के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगा।

सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई आरटीई हिमाचल प्रदेश नियम, 2025 के प्रावधानों के तहत की जाएगी।


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