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घोघड़, नई दिल्ली 15 फरवरी :  देश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों के बीच अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। “CBSE सिलेबस”, “ICSE बोर्ड”, “स्टेट बोर्ड पैटर्न” जैसे शब्द आम चर्चा में सुनाई देते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग शिक्षा बोर्ड (Board) और SYLLABUS(पाठ्यक्रम) के अंतर को स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाते। परिणामस्वरूप कई बार वे बच्चों के लिए उचित विद्यालय का चयन भी सोच-समझकर नहीं कर पाते। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभिभावक बोर्ड और सिलेबस की मूल संरचना समझ लें, तो वे अपने बच्चे के भविष्य, रुचि और लक्ष्य के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि शिक्षा बोर्ड क्या होता है –

शिक्षा बोर्ड वह संस्था है जो पाठ्यक्रम निर्धारित करती है, परीक्षाएं आयोजित करती है, मूल्यांकन और परिणाम घोषित करती है, प्रमाणपत्र जारी करती है तथा विद्यालयों को मान्यता (Affiliation) प्रदान करती है। भारत में प्रमुख रूप से Central Board of Secondary Education (CBSE), Council for the Indian School Certificate Examinations (CISCE – ICSE/ISC) तथा विभिन्न राज्य शिक्षा बोर्ड कार्यरत हैं। राज्य स्तर पर उदाहरण के तौर पर Himachal Pradesh Board of School Education, Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad और Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary Education जैसे बोर्ड शिक्षा संचालन का कार्य संभालते हैं।

इसके विपरीत सिलेबस वह शैक्षणिक ढांचा है जिसमें यह निर्धारित किया जाता है कि किन विषयों को पढ़ाया जाएगा, कौन-कौन से अध्याय शामिल होंगे, किस कक्षा में किस स्तर की पढ़ाई होगी और परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। सरल शब्दों में कहा जाए तो बोर्ड संचालक संस्था है, जबकि सिलेबस पढ़ाई की रूपरेखा है

विशेषज्ञ बताते हैं कि सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया भी अलग-अलग होती है। CBSE के लिए राष्ट्रीय स्तर पर National Council of Educational Research and Training (NCERT) की प्रमुख भूमिका होती है। NCERT पुस्तकों और पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करता है, जिसे CBSE अपने विद्यालयों में लागू करता है।

ICSE/ISC के अंतर्गत सिलेबस स्वयं CISCE परिषद द्वारा विषय विशेषज्ञों की समितियों के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिसमें अंग्रेज़ी माध्यम और विस्तृत विषय-वस्तु पर विशेष बल दिया जाता है।

वहीं राज्य बोर्डों के लिए संबंधित राज्य सरकारों के शिक्षा विभाग, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) तथा विषय विशेषज्ञों की समितियां राज्य की भाषा, संस्कृति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करती हैं। राज्य के शिक्षा बोर्डों में SCERT के साथ-साथ NCERT द्वारा जारी आवश्यक किताबें भी पाठ्यक्रम  में शामिल की जाती हैं। उदाहरण के लिए हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में गणित, विज्ञान व सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों को NCERT के पाठ्यक्रम अनुसार जारी करता है ताकि विद्यार्थी राष्ट्र स्तर पर एक जैसी शिक्षा पा सकें।

किस स्कूल में कौन सा सिलेबस लागू होगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि वह विद्यालय किस बोर्ड से संबद्ध है। यदि कोई विद्यालय CBSE से संबद्ध है तो वहां CBSE/NCERT आधारित सिलेबस लागू होगा। यदि विद्यालय ICSE से संबद्ध है तो CISCE द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। राज्य बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में संबंधित राज्य का सिलेबस लागू होता है। केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में CBSE सिलेबस पढ़ाया जाता है।

कई निजी विद्यालय राज्य बोर्ड से संबद्ध होते हुए भी “CBSE पैटर्न” शब्द का उपयोग करते हैं, जिससे अभिभावकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि विद्यालय आधिकारिक रूप से किस बोर्ड से संबद्ध है और अंतिम बोर्ड परीक्षा किस संस्था के माध्यम से होगी।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भ्रम के प्रमुख कारणों में “CBSE पैटर्न” जैसे शब्दों का प्रयोग, बोर्ड और पुस्तकों के अंतर की जानकारी का अभाव तथा प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था के बारे में स्पष्ट जानकारी न होना शामिल है। अभिभावकों को विद्यालय चयन से पहले यह अवश्य पूछना चाहिए कि विद्यालय किस बोर्ड से संबद्ध है, अंतिम परीक्षा किस बोर्ड द्वारा आयोजित की जाएगी, सिलेबस NCERT आधारित है या राज्य आधारित, और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कौन सा बोर्ड अधिक उपयुक्त रहेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विद्यार्थी का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाएं जैसे इंजीनियरिंग(JEE) या मेडिकल(NEET) प्रवेश परीक्षा है तो CBSE उपयोगी हो सकता है। यदि अभिभावक अंग्रेज़ी दक्षता और विस्तृत अध्ययन को प्राथमिकता देते हैं तो ICSE उपयुक्त विकल्प माना जाता है। वहीं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं या स्थानीय भाषा आधारित शिक्षा के लिए राज्य बोर्ड लाभकारी हो सकता है। INTERSTATE स्थानांतरण वाली नौकरियों में कार्यरत परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड सुविधाजनक सिद्ध होता है।

 शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि केवल नाम या प्रचार के आधार पर विद्यालय का चयन करना उचित नहीं है। शिक्षा बोर्ड और सिलेबस के अंतर को समझकर, बच्चे की रुचि, क्षमता और भविष्य की योजना को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेना चाहिए, ताकि उसके शैक्षणिक भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सके।


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