घोघड़, चम्बा, 25 फरवरी : जिला चम्बा में शिक्षा विभाग उपनिदेशक (प्रारंभिक) और हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी हालिया पत्रों ने निजी स्कूलों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। दोनों विभागों के आदेशों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई दे रहा है, जिसके कारण निजी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की पढ़ाई बाधित हो रही है।
31 जनवरी 2026 को बोर्ड सचिव द्वारा जारी पत्र में सभी संबद्ध निजी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकें केवल बोर्ड द्वारा अधिकृत बुक सेलर्स/विक्रय केंद्रों से ही खरीदें।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय पाठ्यपुस्तकों की खरीद के बाद संबंधित बुक सेलर से प्राप्त बिलों को काउंटरसाइन करवाकर 15 मई 2026 तक सूची बोर्ड को भेजना सुनिश्चित करें।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निरीक्षण के दौरान किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो स्कूल संबद्धता नियम 16.3.13 के अंतर्गत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दूसरी ओर, 17 फरवरी 2026 को उपनिदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक), जिला चम्बा द्वारा जारी पत्र में निजी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय परिसर में किताबें, कॉपियां, वर्दी आदि की बिक्री न की जाए व स्कूल के लोगो वाली किताबें/कॉपियां खरीदने के लिए विद्यार्थियों को बाध्य न किए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं।
जहां जिला शिक्षा उपनिदेशक ने निजी स्कूलों को अपने परिसर से किताबें व वर्दी उपलब्ध न करवाने के आदेश दिए हैं वहीं शिक्षा बोर्ड ने निजी स्कूलों को अधिकृत विक्रेताओं से पुस्तकें खरीदकर बच्चों को उपलब्ध करवाने और उसका रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे में यह निर्णय निजी विद्यालयों की गले की फांस बन गए हैं। अभिभावकों ने इस विषय पर स्कूल शिक्षा बोर्ड के निर्देशों को अनुचित ठहराते हुए उसे वापस लेने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा बोर्ड निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबों को स्वयं खुले बाजार तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है इसलिए वह निजी विद्यालयों को कई प्रकार के नियमों का डर दिखाकर उन्हें किताबें खरीदकर बच्चों को बेचने के लिए बाध्य कर रहा है। निजी विद्यालय प्रबंधकों का कहना है कि वे अब तक अभिभावकों को किताबें वर्दी खुले बाजार से खरीदने के लिए कहते रहे हैं। उनका कहना है कि विद्यालयों में बोर्ड द्वारा निर्धारित किताबें ही पढ़ाई जा रही हैं जिसकी जांच बोर्ड प्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर की जाती है।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा बोर्ड द्वारा स्कूलों पर बनाए जा रहे किताबें बिक्री के दबाव का खामियाजा सीधे विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि बोर्ड निजी स्कूलों में किताबें बिक्री मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें ताकि न तो विद्यालयों पर कार्रवाई का भय रहे और न ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो। उधर सरकारी विद्यालयों में तो किताबें पहुंच गई हैं परंतु ग्रामीण क्षेत्रों के निजी विद्यालयों की स्थिति और जटिल हो गई है, जहां अधिकृत विक्रेता सीमित हैं और पाठ्य पुस्तकों की समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही। परिणामस्वरूप कई स्कूलों में कक्षाएं प्रारंभ होने के बावजूद विद्यार्थियों के पास पूरी पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। अभिभावकों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित निर्णय लेने की मांग की है।
इस संदर्भ में शिक्षा उप निदेशक (प्रारम्भिक) विकास महाजन का कहना है कि शिक्षा विभाग के निजी विद्यालयों को किताबें व वर्दी न बेचने के निर्देश स्पष्ट हैं जिसमें विद्यालयों को किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में 12 फरवरी से नया शैक्षणिक सत्र आरम्भ हो चुका है परंतु 13 दिनों का शैक्षणिक सत्र बीत जाने के बाद भी बाजार में पाठ्यक्रम पुस्तकें उपलब्ध न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।


