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घोघड़, ऊना, 1 फ़रवरी : उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट हिमाचल प्रदेश के हितों की उपेक्षा करता है। उनके अनुसार, बजट में पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियों को नजरअंदाज किया गया है, जिससे हिमाचल के साथ सीधा अन्याय हुआ है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र का यह दृष्टिकोण संघीय ढांचे की मूल भावना के विपरीत है। इसका नकारात्मक प्रभाव राज्य के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय स्थिरता पर पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के दौरान हिमाचल प्रदेश को केंद्र से लगभग 38 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था, लेकिन अब इस अहम सहायता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। राज्य को उम्मीद थी कि उसकी विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को देखते हुए इस अनुदान में बढ़ोतरी की जाएगी।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को दिए जाने वाले विशेष अनुदानों को खत्म करना विकास की रफ्तार को प्रभावित करेगा और जनहित की योजनाओं व वित्तीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करेगा।

उप मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से बजट प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को उसके संवैधानिक अधिकारों और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप न्यायोचित बजटीय सहयोग मिलना चाहिए।


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