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घोघड़, चम्बा, 07 जनवरी 2026 : एक जमाना था खेलकूद को केवल मनोरंजन व मन बहलाने की क्रिया माना जाता था। उसके बाद एक दौर ऐसा आया जब खेलकूद को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाने लगा परंतु खेल-कूद अब उस कालखंड में पहुंच चुका है जब इसे पूर्व वर्णित सभी उपयोगों के साथ-साथ इसे व्यवसायिक रूप में भी स्वीकारता मिली है।

लोग खेलों के माध्यम से देश व दुनिया में अपना नाम चमकाने के साथ-साथ खूब धन कमा रहे हैं। खेलों की दुनिया की अग्रणी पंक्ति में शामिल होने के लिए लगातार अभ्यास व प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र भरमौर से कोई भी युवा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों तक नहीं पहुंच पाए हैं। यदा कदा कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा भी है तो वह विशेष वर्ग की श्रेणी से सम्बंधित रहा है। इस क्षेत्र से युवाओं का खेलों में आगे न बढ़ पाने का मूल कारण क्षेत्र में खेल मैदानों का न होना है। 

क्षेत्र के युवा कहीं खेतों तो कहीं सड़क पर खेलते नजर आते हैं। परंतु अब क्षेत्र में पहला खेल मैदान मिलने की आशा बढ़ गई है। लोगों की मांग पर कुठेड़ जलविद्युत परियोजना निर्माण में जुटी कम्पनी जेएसडब्लयू  के माध्यम से गरोला के ब्योटी नामक स्थान पर खेल मैदान निर्मित करने का निर्णय लिया है।

   अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) भरमौर ने जिला चम्बा के भरमौर उपमंडल अंतर्गत गरोला के ब्योटी नाला में खेल मैदान के निर्माण के लिए JSW 240 मेगावाट  जलविद्युत परियोजना से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद के अंतर्गत शीघ्र धनराशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि कुठेड़ जल विद्युत परियोजना निर्माण के दौरान निकले मलबे को ठिकाने लगाने के लिए ब्योटी नाला में डम्पिंग साइट में प्रयोग किया गया था। मलबे से भर जाने के बाद अब उक्त नाले पर बड़ा हिस्सा मैदान के रूप में उभर आया है। ग्रामीण इस स्थान को अब खेल मैदान के रूप तैयार करने की मांग कर रहे हैं। 

गत वर्ष मार्च माह में स्थानीय गैर सरकारी संगठन गद्दी जनजाति विकास महासभा ने इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन व कम्पनी प्रबंधन के साथ बैठक कर ब्योटी नाला में खेल मैदान निर्माण की मांग की थी। लोगों की इस मांग पर स्थानीय प्रशासन ने लोनिवि को मैदान का प्राक्कलन व आकलन तैयार करने के निर्देश दिए ।

गत वर्ष मई माह में सहायक अभियंता लोनिवि उपमंडल गरोला ने मैदान का 86.75 लाख रुपए खर्च का आकलन व प्राक्कलन तैयार करके भरमौर प्रशासन को सौंप दिया। जिस पर आगामी कार्यवाही करते हुए ADM भरमौर की ओर से JSW 240 मेगावाट कुठेड़  परियोजना के महाप्रबंधक को पत्र जारी किया गया है। जिसमें ब्योटी नाला, डाकघर गरोला, तहसील भरमौर में खेल मैदान के निर्माण के लिए 86.75 लाख रुपये का अनुमान प्रस्तुत किया गया है।

प्राक्कलन के अनुसार कंक्रीट की मोटी तह वाले इस खेल मैदान की सीमाएं दीवार व जाली से बंद की जाएंगी व आकर्षक द्वार भी बनाया जाएगा।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जलविद्युत परियोजना की स्थापना के कारण क्षेत्र की खेल सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। स्थानीय समुदाय को सूखा, धूल प्रदूषण, मलबा, भूस्खलन, असमय वर्षा, फसल क्षति तथा बागवानी गतिविधियों को नुकसान जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे में खेल मैदान का निर्माण क्षेत्र में खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ सामाजिक कल्याण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक बताया गया है।

एडीएम भरमौर ने यह भी उल्लेख किया है कि कंपनी और संबंधित पंचायत के बीच हुए समझौते में कंपनी द्वारा प्रस्तावित स्थान पर खेल मैदान के निर्माण का आश्वासन दिया गया था। यह स्थान वही है, जहां मलबा (मक) डंपिंग की अनुमति प्रदान की गई थी। इसके अतिरिक्त इस विषय में 17 मार्च 2025 को  एडीएम भरमौर की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें कंपनी द्वारा खेल मैदान निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की गई थी। 

 स्थानीय जनता की मांग और समुदाय द्वारा झेली जा रही कठिनाइयों का हवाला देते हुए प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए तत्काल आवश्यक धनराशि आवंटित करने का अनुरोध किया है तथा मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

गद्दी जनजाति विकास महासभा प्रधान सतपाल सिंंह, प्रधान ग्राम पंचायत खणी श्याम सिंह ठाकुर, सलाहकार हेम राज, कोषाध्यक्ष रणजीत राम, सदस्य जालम सिंह राणा व विजय कुमार ने खेल मैदान निर्माण की दिशा में बढ़ती कार्यवाही पर कहा कि खेल मैदान के निर्माण से क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी। परंतु इसे केवल कागजों में नहीं बल्कि जल्द व्यवहारिक रूप से अमल में लाना होगा।

प्रशासन द्वारा कम्पनी प्रबंधन को भेजे गए खेल मैदान के लिए आवश्यक धनराशि जारी करने के आग्रह पत्र के बाद अब फैसला कम्पनी प्रबंधन पर टिक गया है। अगर कम्पनी निर्धारित फंड को तुरंत जारी कर देती है तो क्षेत्र के युवाओं के लिए जल्द खेल मैदान मिल सकता है।


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