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घोघड़, चम्बा 10 मार्च : नशा मुक्ति चेतना संघ के सह-संयोजक डॉ. अमित कांसल ने कहा है कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की शक्ति को भी कमजोर करती है। इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक जन-जागरण, अच्छे संस्कार और सामाजिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के सकारात्मक कार्यों से जोड़ना है।

इसी उद्देश्य के तहत डॉ. अमित कांसल ने चम्बा जिले में आठ दिवसीय प्रवास के दौरान सलूनी, तेलका, तीसा, हिमगिरी, भरमौर, छतराड़ी और डलहौजी क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद कर नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

राजकीय महाविद्यालय भरमौर में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आज का युवा नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल, संस्कृति और समाज सेवा की दिशा में आगे बढ़े, तो देश को सशक्त और समृद्ध बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपने परिवार व समाज में भी इसके विरुद्ध जागरूकता फैलाएं।

प्रवास के दौरान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी जागरूकता कार्यक्रम और बैठकें आयोजित की गईं। इस अवसर पर डॉ. अमित कांसल ने भरमौर स्थित ऐतिहासिक 84 मंदिर परिसर, माता भरमाणी माता मंदिर, माता छतराड़ी मंदिर और माता भलेई मंदिर में दर्शन कर श्रद्धा अर्पित की ।

डॉ. कांसल ने बताया कि नशा मुक्ति चेतना संघ देशभर में युवाओं, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदाय के बीच जागरूकता अभियान चला रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयास, सामाजिक जागरूकता और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से नशा मुक्त, स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।


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