घोघड़, चम्बा(भरमौर), 15 फरवरी : भारत में आज हर स्थान पर महाशिवरात्रि की धूम है। हर राज्य व क्षेत्र में इस शिव पर्व को लेकर अपनी-अपनी कहानी व परम्पराएं हैं जहां वे अपनी परम्पराओं के अनुरूप महाशिवरात्रि पर्व मना रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र भरमौर में पिछले दो दिनों से महाशिवरात्रि के आयोजन की तैयारियां चल रहीं थी। आज सुबह से ही क्षेत्र के करीब-करीब हर गांव व पंचायत के शिव मंदिरों में पूजा व विशेष अनुष्ठान आरम्भ हो गए। खड़ामुख नामक स्थान पर शिवभूमि सेवादल ने नुआळा अर्पित किया जबकि चौरासी मंदिर प्रांगण में आज रात शिव नुआळा हो किया जा रहा है।
इस अवसर पर चौरासी मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश के पड़ोसी राज्य पंजाब, जम्मू कश्मीर, हरियाणा व दिल्ली से भी सैकड़ों श्रद्धालु भरमौर पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं की भारी संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके वाहनों को खड़ा करने के लिए भरमौर में जगह कम पड़ गई। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मुख्यालय में फलाहार व भोजन की व्यवस्था की गई थी।
अनुभूति हो रही थी मानो मणिमहेश यात्रा आरम्भ हो गई हो।
युवक मंडल भरमौर व कुछ अन्य सेवादारों द्वारा इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए फलाहार व सांस्कृतिक मंच उपलब्ध करवाया गया। सैकड़ों युवक युवतियां आज सारा दिन चौरासी प्रांगण में शिव भजनों पर थिरकते रहे। दूसरी ओर स्थानीय महिलाओं ने शिव मंदिर में लोक भजन गायन किया।
यहां आपको बताना आवश्यक है कि अपनी उत्तरी भारत में सांस्कृतिक व धार्मिक धरोहर को संजोए गद्दी जनजाति में महाशिवरात्रि को लेकर अपनी अलग धारणा है। गद्दी मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव शिवरात्रि के बाद मणिमहेश कैलाश से धरती की सत्ता सम्भालेंगे। जो आज रात्रि भरमौर के चौरासी मंदिर में रात्रि ठहराव के बाद कल सुबह मणिमहेश के लिए रवाना होंगे।
भगवान शिव के रात्रि विश्राम के लिए शिव मंदिर में उनके लिए उनका शयन कक्ष तैयार कर दिया गया। अपने बुजुर्गों से सुनी किंवदंतियों को साझा करते हुए चौरासी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी छज्जू राम शर्मा बताते हैं कि आज जिन परम्पराओं का निर्वहन किया जा रहा है वे कई शताब्दियों से चली आ रही हैं। इनका कहीं लिखित उल्लेख भले न मिले परंतु यह वार्षिक त्योहार लगातार अपनी परम्पराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ इसमें कुछ अच्छे बुरे बदलाव भी हुए हैं जिन पर नई पीढ़ी को मंथन करना होगा।
उन्होंने इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज रात जब महादेव भरमौर पहुंचेंगे तो वे विश्राम के लिए अपने कक्ष में चले जाएंगे परंतु उनके साथ चलने वाले भूत-प्रेत, डाकिनी, व सृष्टि में विचरण करने वाले नाना प्रकार के जीव जंतु अपने रात्रि आश्रय के लिए इधर उधर भटकेंगे। ऐसे में सभी लोग अपने आवास के प्रवेश द्वार पर बेकलें नामक पौधे के कांटे लगा लें।
देवी चामुंडा के चेले(गुर) हरिराम ठाकुर बताते हैं कि युवक मंडल भरमौर द्वारा महाशिवरात्रि पर्व का आयोजन बहुत अच्छी प्रकार से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गद्दी समुदाय शिव के गण हैं और हमारी पूजा पद्धति अन्य से अलग है। हमारा हर कार्य शिव को समर्पित है । उन्होंने कहा कि परम्पराएं हमारे इतिहास को जीवित रखती हैं इसलिए शिव अनुष्ठान विधियों में न तो कुछ जोड़ा जाना चाहिए व न ही हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के अन्य भागों के लोग भी गद्दी गणों के शिवरात्रि पर्व अनुष्ठान व रीति रिवाजों को जानने के उद्देश्य से यहां बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं इसलिए अब समय आ गया है कि स्थानीय लोग इस अवसर पर अपनी पारम्परिक वेशभूषा में बाहर निकलें।
धर्मराज मंदिर पुजारी भुवनेष शर्मा बताते हैं कि भगवान शिव के स्वागत के लिए पुजारी वर्ग ने हर तैयारी कर ली है। आज शिव मंदिर व धर्मराज मंदिरों चारों पहर आरती होगी। सभी मंदिरों के शिवलिंग व देव प्रतिमाओं का शृंगार कर शिव विश्राम की व्यवस्था की गई है।
इस अवसर पर विद्युत विभाग द्वारा शिव नुआळे का आयोजन किया जा रहा है। विभाग के पूर्व कर्मचारी विजय शर्मा ने बताया कि देवी भरमाणी का आह्वान कर उनके चिन्ह को चौरासी मंदिर में स्थापित कर उनके सम्मुख यह नुआळा अर्पित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पिछले तीन दशकों से यह नुआळा अर्पित किया जा रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया हा कि वे कल सोमवार को नुआळे का प्रसाद ग्रहण करने चौरासी मंदिर प्रांगण में पधारें।

