घोघड़, चम्बा, 30 जनवरी : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इतना तीव्र है कि एक क्षण में कंटेंट(Post) दुनिया के हर कोने में पहुंच जाता है। यह तुरंत सूचना पाने का यह बेहतर मंच साबित हो रहा है परंतु इसमें कई बार भावनाओं, मर्यादा, नैतिकता, निजता, संवेदशीलता की सीमाओं को लांघा जा रहा है।
हिप्र के जनजातीय क्षेत्र भरमौर में 23 जनवरी को भरमाणी जंगल में बर्फीले मौसम के कारण जान गंवाने वाले मलकौता गांव के 19 वर्षीय विक्षित राणा व घरेड़ गांव के पीयूष चौहान की मृ्त्यु के बाद उनसे सम्बंधित कई प्रकार के कंटेंट सोशल मीडिया व मेन स्ट्रीम मीडिया में प्रसारित हो रहे हैं। इन कंटेंट्स से मृतकों के परिवार की भावनाएं आहत हो रही हैं। परिवारजनों को इसे रोक देने की अपील करनी पड़ रही है।
विक्षित राणा के ताया चरणजीत सिंह राणा ने कहा कि विक्षित राणा व पीयूष के बर्फीले पहाड़ में लापता हो जाने के बाद हमारे गांव वासियों, पर्वतारोहण, पुलिस, एनडीआरएफ, सेना व स्थानीय प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित खोजने में भरपूर सहयोग दिया परंतु भाग्य को शायद कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने खोज अभियान में मदद के लिए सबका आभार जताया । उन्होंने रुआंसे शब्दों में कहा कि तीन दिन लगातार लोग बर्फीले पहाड़ की कंदराओं व खाइयों में बच्चों के बचाव के लिए तलाश करते रहे।
उन्होंने कहा कि बच्चों के मिल जाने तक के समाचारों व सूचनाएं प्रसारित होना एक आवश्यक प्रक्रिया है लेकिन उसके एक सप्ताह बाद भी सोशल मीडिया में विक्षित, पीयूष व कुत्ते को लेकर कई दृष्टिकोणों से कंटेट्स परोसा जा रहा है। परिवारजन जब भी मोबाइल स्क्रीन खोलते हैं सामने विक्षित और पीयूष की तस्वीरों वाली नई-नई पोस्टें सामने आ रही हैं जिन्हें देखकर परिवार के लोगों जख्म फिर से हरे हो रहे हैं।
चरणजीत सिंह राणा ने कहा कि वे जानते हैं कि सब लोगों को उनकी असमय मृत्यु का दुख हो रहा है, वे लोगों भावनाओं का सम्मान करते हैं परंतु अब उनका कंटेंट परिवारजनों को मानसिक पीड़ा पहुंचा रहा है। परिवार हादसे से उबरने का प्रयास कर रहा है लेकिन सोशल मीडिया पर हर दिन सामने आ रहा नया कंटेंट उन्हें फिर से विचलित कर रहा है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इन बच्चों से सम्बंधित कोई पोस्ट सोशल मीडिया पर न डालें।

