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घोघड़, हमीरपुर, 30 जनवरी 2026 : जिले में भ्रूण के लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में समिति के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों ने भाग लिया।

बैठक की शुरुआत में समिति के सदस्यों ने हाल ही में दिवंगत हुए गैर-सरकारी सदस्य मदन लाल कौंडल के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग भ्रूण के लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम को लेकर पूरी तरह सतर्क है। विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर निरीक्षण और निगरानी के चलते हाल के वर्षों में जिला हमीरपुर में इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जिले के शिशु लिंगानुपात में सुधार के रूप में दिखाई दे रहा है।

बैठक में जिले की तीन अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों के लाइसेंसों के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि नियमानुसार पांच वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद अल्ट्रासाउंड मशीनों एवं क्लीनिकों का पंजीकरण नवीनीकरण अनिवार्य होता है। इसके अतिरिक्त नई अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद एवं पंजीकरण तथा पुरानी मशीनों की बिक्री से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने बैठक में जिले के विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में समिति के अन्य सरकारी सदस्य डॉ. अनिल कुमार, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. स्वाति चंदेल, सहायक जिला न्यायवादी डी.के. ठाकुर, अन्य अधिकारी तथा गैर-सरकारी सदस्य सुषमा शर्मा भी उपस्थित रहीं।


यह समाचार आम जनता के लिए कैसे हितकर है?

  1. कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक — इस प्रकार की बैठकों से यह सुनिश्चित होता है कि कानून का सख्ती से पालन हो, जिससे बेटियों के अधिकारों की रक्षा होती है।

  2. स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता — अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित समीक्षा से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगता है और जनता को भरोसेमंद चिकित्सा सेवाएं मिलती हैं।

  3. शिशु लिंगानुपात में सुधार — सतर्क निगरानी से समाज में लैंगिक संतुलन बेहतर होता है, जो दीर्घकालीन सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।

  4. कानून के प्रति जागरूकता — आम नागरिकों को पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम की जानकारी मिलती है, जिससे वे किसी भी अनियमितता की सूचना समय पर प्रशासन को दे सकते हैं।

इस प्रकार, जिला स्तरीय समिति की यह पहल समाज में समानता, कानून के पालन और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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