घोघड़, शिमला, 22 जनवरी 2026 : सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों को राहत शीघ्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन शिमला ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब सड़क हादसे में मृत्यु होने की स्थिति में चार लाख रुपये की एक्सग्रेशिया राशि अनिवार्य रूप से 15 दिनों के भीतर जारी करनी होगी। इस कार्य की पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) की होगी।
यह निर्णय उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रभावित परिवार को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, यह सुनिश्चित करना एसडीएम की जिम्मेदारी होगी। निर्धारित समय-सीमा के भीतर राशि पीड़ितों तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।
उपमंडल स्तर तक सक्रिय होगी सड़क सुरक्षा समिति
जिला शिमला में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सड़क सुरक्षा समिति के दायरे को जिला स्तर से बढ़ाकर उपमंडल स्तर तक विस्तारित किया गया है। अब प्रत्येक एसडीएम की अध्यक्षता में उपमंडल स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति कार्य करेगी, जिसमें संबंधित विभागों के अधिशासी अभियंता (एक्सईन), पुलिस के डीएसपी और अन्य हितधारक शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यातायात नियमों के पालन, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और ‘गोल्डन आवर’ में घायलों को त्वरित सहायता सुनिश्चित करना है।
शिमला रेफर घायलों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त
जिले के विभिन्न हिस्सों से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर शिमला के अस्पतालों में रेफर होने वाले मरीजों को आर्थिक एवं अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए एसडीएम (शहरी) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रभावित व्यक्ति या उनके परिजन सीधे एसडीएम शहरी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं, ताकि इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत व्यापक अभियान
उपायुक्त ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के लिए 1 से 31 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जिला भर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सड़क सुरक्षा शपथ, विशेष निरीक्षण अभियान, नशे में वाहन चलाने पर कार्रवाई, गलत दिशा में ड्राइविंग, हेलमेट और सीट-बेल्ट के उपयोग तथा लेन अनुशासन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्कूलों, कॉलेजों, टैक्सी और बस चालकों तथा आम जनता के लिए कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटक, सुरक्षा प्रश्नोत्तरी और स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ ही चालकों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। ‘गुड समैरिटन’ प्रोत्साहन योजना के माध्यम से सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विश्व मोहन देव चौहान ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश में कुल 1920 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 789 लोगों की मौत हुई और 3030 लोग घायल हुए। जिला शिमला में इसी अवधि के दौरान 268 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 102 लोगों की जान गई और 436 लोग घायल हुए।
जिले में सबसे अधिक दुर्घटनाएं बालूगंज थाना क्षेत्र में दर्ज की गईं, जहां 40 हादसों में 10 मौतें हुईं। इसके बाद रोहड़ू थाना क्षेत्र में 33 दुर्घटनाएं और 8 मौतें, न्यू शिमला में 21 दुर्घटनाएं और 6 मौतें, ठियोग में 21 दुर्घटनाएं और 7 मौतें तथा कुमारसैन में 18 दुर्घटनाएं और 10 मौतें दर्ज की गईं। आंकड़ों के अनुसार जिले में औसतन हर तीन सड़क दुर्घटनाओं में एक मौत हो रही है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर 114 दुर्घटनाओं में 15 मौतें और 207 घायल हुए, जबकि राज्य मार्गों पर 27 दुर्घटनाओं में 21 लोगों की जान गई। अन्य मार्गों पर 129 दुर्घटनाओं में 60 मौतें दर्ज की गईं। शहरी क्षेत्रों में 74 और ग्रामीण क्षेत्रों में 194 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। अधिकांश दुर्घटनाएं ओवरस्पीडिंग, गलत ओवरटेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाने और लेन अनुशासन के उल्लंघन के कारण हुईं।
बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

