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घोघड़, चम्बा, 12 जनवरी 2026 : जिला चम्बा में कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से यूनिट टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि इन टेस्टों के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया जाएगा तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए विशेष रेमेडियल कक्षाएं शुरू की जाएंगी।

उपायुक्त ने जानकारी दी कि यूनिट टेस्ट नियमित शिक्षण अवधि के दौरान ही आयोजित होंगे। कक्षा 10वीं के लिए टेस्ट की अवधि 30 मिनट जबकि कक्षा 12वीं के लिए 45 मिनट निर्धारित की गई है। यह टेस्ट बोर्ड परीक्षा के पैटर्न और अंकन योजना के अनुरूप होंगे। उन्होंने बताया कि यह पहल उपनिदेशक शिक्षा विकास महाजन से विचार-विमर्श के बाद शुरू की गई है और जिले के सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में यूनिट टेस्ट ऑनलाइन माध्यम से जबकि ग्रीष्मकालीन विद्यालयों में ऑफलाइन आयोजित किए जाएंगे। प्रश्न पत्र टेस्ट से एक दिन पूर्व उपनिदेशक शिक्षा विभाग, चम्बा कार्यालय द्वारा ई-मेल के माध्यम से भेजे जाएंगे। वहीं वैकल्पिक विषयों के प्रश्न पत्र संबंधित विद्यालय स्वयं तैयार करेंगे।

टेस्ट संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा और अगले दिन विद्यार्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं दिखाकर सही उत्तरों पर चर्चा की जाएगी। प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों को वर्गीकृत किया जाएगा। विद्यालयों में कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए रेमेडियल कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

रेमेडियल कक्षाएं 19 जनवरी 2026 से प्रतिदिन सुबह 8:50 से 9:30 बजे तक संचालित होंगी। प्रत्येक विषय की कक्षाएं सप्ताह में दो दिन लगेंगी। इनमें कक्षा 12वीं के लिए विज्ञान, कला एवं वाणिज्य संकाय से संबंधित विषय तथा कक्षा 10वीं के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय शामिल किए गए हैं।

उपायुक्त ने बताया कि ग्रीष्मकालीन विद्यालयों के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड जिला कार्यक्रम अधिकारी, समग्र शिक्षा के पास सुरक्षित रखे जाएंगे, जबकि शीतकालीन विद्यालयों के रिकॉर्ड संबंधित विषय अध्यापक द्वारा विद्यालय के प्रधानाचार्य के पास जमा करवाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शीतकालीन अवकाश के दौरान परीक्षा-उन्मुखी तैयारी को सुदृढ़ करना, विद्यार्थियों की अवधारणात्मक स्पष्टता बढ़ाना, नियमित अभ्यास और संदेह निवारण को प्रोत्साहित करना है, ताकि आगामी बोर्ड परीक्षाओं में सभी विद्यार्थी बिना किसी दबाव के सफल हो सकें और अपने भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।


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